नगर विकास मंत्री आजम खां की सख्ती के बाद सभी खेमे सन्न हैं। बिगड़े हालात में विधायक अपना बचाव करने की रणनीति भी बना रही हैं।
इस बीच पूरे प्रकरण पर न कोई पदाधिकारी बोलने को तैयार है और न कार्यकर्ता। बयानबाजी महंगी पड़ सकती है। कार्यकर्ता और पदाधिकारियों को कार्रवाई का खौफ सता रहा है।
दूसरी ओर विधायक लक्ष्मी गौतम मंगलवार को दिन भर जनता से दूर रहीं। मीडिया से भी बातचीत करने से परहेज किया।
विधायक पति दिलीप वार्ष्णेय ने कहा कि सपा नेतृत्व करेगा उन्हें नेतृत्व पर भरोसा है।
बिलारी में विधायक हाजी इरफान के बुलावे पर आए नगर विकास मंत्री आजम खां ने सोमवार की शाम विधायक लक्ष्मी गौतम को आडे़ हाथ लिया था।
पार्टी की किरकिरी कराने को लेकर उन्हें फटकार लगाई थी। इस घटना के बाद सपा के सभी खेमे सन्न हैं। मंगलवार को कहीं से कोई बयानबाजी नही हुई।
सपा नगर अध्यक्ष का खेमा लक्ष्मी गौतम के लिए बचाव का रास्ता तलाशता रहा। वहीं मुकुल अग्रवाल ने भी सपा में राजनीतिक संरक्षण के लिए भागदौड़ की। उसके परिवार वालों ने पूरे प्रकरण में चुप्पी साधे रखी।
फिलहाल मेरी तबीयत खराब है। मुझे मीडिया से कुछ नहीं कहना। - लक्ष्मी गौतम, विधायक।
हर कोई अपने तरीके से कर रहा है विश्लेषण
विधायक कहती हैं उन्हें पिस्टल और रिवाल्वर से धमकाया गया। तो विधायक पति का बयान आया कि पति-पत्नी के बीच वो का नाम आने के बाद मामला बिगड़ गया था।
आखिर सच क्या है। राजनीतिक हलकों में इसकी खासी चर्चा है। अन्य संगठनों के साथ समाज में भी यही प्रकरण छाया हुआ है।
घटनाक्रम में जो बयानबाजी विधायक और उनके पति की ओर से मीडिया के सामने हुई है उसे लेकर समाज के लोग अपने अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे हैं।
बयानबाजी से दोनों पक्षों की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगा है। आम लोगों का आंकलन है कि बयानबाजी उचित नहीं रही। परिवार का झगड़ा परिवार में निबटाना चाहिए था।
विदेशों में भी पढ़ा गया लक्ष्मी प्रकरण
मीडिया की सुर्खियों में आया विधायक फैमिली का विवाद देश विदेश में पढ़ा गया। चंदौसी से संपर्क रखने वाले तमाम लोग फोन करके खुद को अपडेट कर रहे हैं। पूछ रहे हैं कि अब इस प्रकरण में क्या हो रहा है।