सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि देश भर में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाएं दम तोड़ रही हैं। इसके पीछे राजनीति है। क्षेत्रीय नेता अपनी भाषा के साथ ‘दोगलापन’ करते हैं। वोट क्षेत्रीय भाषा में मांगते हैं और संसद में अंग्रेजी बोलते हैं।
मुलायम ने कहा कि ऐसे लोगों से न देश का भला होगा, न हिंदी का। उन्होंने कहा कि सपा अंग्रेजी नहीं, अंग्रेजी की अनिवार्यता के खिलाफ है। देश में एकता और तरक्की चाहिए तो हिंदी में काम करना होगा।
इस्लामियां इंटर कालेज परिसर में शनिवार को आयोजित हिंदी सेवा निधि के सम्मान समारोह में मुलायम ने हिंदी के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि जब वह रक्षा मंत्री थे तब रक्षा मंत्रालय में हिंदी अनिवार्य करवा दी थी।
1990 में प्रदेश में सपा सरकार बनी तो लोक सेवा आयोग से अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म करवाई। चीन, यूरोप, रूस के लोग भी अंग्रेजी नहीं, अपनी मातृ भाषा में बात करते हैं।
केरल के राज्यपाल निखिल कुमार ने कहा कि हिंदी का प्रचार प्रसार राष्ट्रीय एकता के लिए हो, न कि वहां की राष्ट्रभाषा को काटकर विद्वेष पैदा करने के लिए। पूरे देश में हिंदी को संपर्क भाषा के तौर पर मान्यता मिले।
फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने में फिल्मों ने अहम रोल अदा किया है। आज की हिंदी पहले की अपेक्षा ज्यादा कठिन है। साहित्यकार ऊषा राजे सक्सेना ने कहा कि देश में हिंदी के लेखकों में गुटबाजी है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केसरी नाथ त्रिपाठी, महाधिवक्ता विनय चंद्र मिश्र ने भी संबोधित किया। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश जीएस सिंघवी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
केरल के राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ के अध्यक्ष प्रो. उदय प्रताप को जनवाणी सम्मान से सम्मानित करने के साथ ही हिंदी सेवानिधि की वेबसाइट लांच की। इस दौरान तिग्मांशु धूलिया समेत कई हस्तियों को सम्मानित किया गया।