डाला बिल्ली मारकुंडी स्थिति कृष्ण माइंस खदान।स्रो जागरूक पाठक
सोनभद्र। खदान हादसे की जांच कर रही एसआईटी ने अहम खुलासा किया। जिस खदान में हादसा हुआ, उसकी संरचना बेहद कमजोर थी। उसे देखकर मजदूर खदान में जाने से डर रहे थे। इसके बाद भी उन्हें जबरन असुरक्षित ढंग से काम करने के लिए विवश किया गया। नतीजा विशाल चट्टान धंसने से सात मजदूरों की जान चली गई। जान बूझकर मजदूरों की जिंदगी को खतरे में डालने वालों पर पुलिस शिकंजा कसने में जुट गई है।
बिल्ली मारकुंडी स्थित श्री कृष्णा माइनिंग की खदान का पट्टा मई 2016 में हुआ था, जो दस साल के लिए मई 2026 तक वैध है। पिछले नौ साल में नियम विरुद्ध मनमाने तरीके से खदान में खनन किया गया। इससे खदान 250 फीट से ज्यादा गहरी हो गई है। खान सुरक्षा निदेशालय की ओर से पहले कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ था। इसके बाद डीजीएमएस ने खान नियमावली की धारा 22-सी के तहत इस खदान में खनन पर रोक लगा दी थी। यहां सिर्फ सुधारात्मक कार्य की अनुमति थी। इसके बावजूद खदान मालिक दबंगई के बल पर इसमें मनमाने तरीके से खनन कराते रहे। 15 नवंबर को सीएम के आगमन पर जब पूरे क्षेत्र में खनन बंद कराया गया था, तब भी इस खदान में काम नहीं रोका गया।
मजदूरों को धमकाकर गहरी खदान में ले जाया गया। खतरे को देखते हुए कई मजदूरों ने काम करने से साफ मना कर दिया था। बताते हैं कि मजदूरों को सात-आठ फीट गहराई तक डि्रलिंग के लिए कहा गया था। खदान की संरचना बेहद कमजोर थी। जो चट्टान धंसी, वह पहले ही एक तरफ से झूल रही थी। ऐसे में गहरी डि्रलिंग होते ही वह गिर गई और मजदूर उसके नीचे दब गए।
हादसे में किसी तरह जिंदा बचे मजदूर लालता व अन्य ने पुलिस को बताया कि वह खदान की खतरनाक स्थिति को देखते हुए वहां काम करना नहीं चाहते थे, मगर मेट व पेटीदाराें ने जबरन उन्हें नीचे भेजा। एसआईटी की जांच में सामने आया कि डि्रलिंग के वक्त मजदूरों को सुरक्षा उपकरण भी नहीं दिए गए थे।