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Sonebhadra News: ड्राइविंग आए या न आए, मिल जाएगा लाइसेंस

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सोनभद्र। अगर आपको जिले में ड्राइविंग लाइसेंस चाहिए तो चिंता की कोई बात नहीं। किसी ड्राइविंग स्कूल से संपर्क करिए। मनमाफिक फीस दीजिए और ड्राइविंग में पारंगत होने का प्रमाण पत्र लेकर एआरटीओ कार्यालय में ऑनलाइन आवेदन कर दीजिए। उस प्रमाण पत्र को आधार मानकर विभाग बिना किसी ड्राइविंग टेस्ट के आपको चार पहिया वाहन चलाने का लाइसेंस जारी कर देगा। फिर सड़कों पर उतरकर फर्राटे भरने से आपको कोई नहीं रोकेगा। ट्रैफिक नियम तोड़िए या किसी को टक्कर मारिए, विभाग को इसकी चिंता नहीं है।
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अभियान चलाकर लोगों को सड़कों पर चलने के नियम बताए जा रहे और उसका पालन करने की अपील की जा रही है, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में मानकों का पालन नहीं हो रहा। सिर्फ ड्राइविंग स्कूल के प्रमाण पत्र को आधार मानकर चार पहिया वाहन चलाने का लाइसेंस जारी हो जा रहा है।
जिले में 17 हजार से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस बन चुके हैं। इसमें करीब छह हजार लोगों के पास व्यावसायिक वाहन चलाने का लाइसेंस भी है। नियमानुसार लाइसेंस जारी करने से पहले आवेदक का ट्रैक पर वाहन चलाने का टेस्ट लेना जरूरी है। उसमें उत्तीर्ण होने के बाद ही उसे लाइसेंस देना होता है, ताकि वह सड़क पर वाहन लेकर उतरे तो कोई हादसा न हो। जिले में कोई ड्राइविंग ट्रैक न होने की दलील देकर अफसर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। नतीजा बिचौलियों और ड्राइविंग स्कूल संचालक की मिलीभगत से वाहन चलाने की जानकारी न होने के बाद भी लाइसेंस बन रहे हैं।
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ट्रैफिक सेंस नहीं, जहां-तहां घुस जाते हैं वाहन
जिले में सड़क हादसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर 12 स्थान ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित हैं। यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। डिवाइडर और ट्रैफिक सिग्नल न होने के कारण लोग सड़कों पर बेपरवाह होकर वाहन दौड़ाते हैं। जब चाहे, जहां चाहे, वहीं से वाहन लेकर बीच सड़क पर घुस जाते हैं। युवा चालकों के साथ ऐसी दिक्कत सबसे ज्यादा है।
ओवर स्पीड और रांग साइड से बढ़ रहे हादसे
वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट जितना जरूरी है, उतना ही सही दिशा और नियंत्रित गति भी। जिले की सड़कों पर आए दिन हो रहे हादसों के पीछे तेज गति और गलत दिशा भी एक बड़ी वजह है। पिछले तीन में 40 से अधिक हादसे ऐसे हुए हैं, जिनका कारण तेज गति और गलत दिशा रही।
केस एक : 21 सितंबर को वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर वन विभाग कार्यालय के समीप गलत दिशा में घुसे कार चालक ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी। दुर्घटना में 32 वर्षीय बाइक सवार राजेश को चोट आई। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
केस दो : छह अगस्त को मधुपुर से सुकृत की तरफ जा रहे एक बाइक सवार उसी लेन में विपरीत दिशा से आ रहे दूसरे बाइक से टकरा गए। दोनाें बाइक सवारों की गति काफी तेज थी। किसी ने हेलमेट भी नहीं पहना था। उन्हें सिर व हाथ-पैर में कई जगह गंभीर चोट आई। आसपास के लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
ड्राइविंग लाइसेंस के यह हैं नियम
परिवहन विभाग की वेबसाइट पर सबसे पहले लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करना होता है। इसके बाद ऑनलाइन टेस्ट का मौका दिया जाता है। इसमें मानसिक कुशलता जानने के लिए यातायात संकेतकों व नियमों से जुड़ी सामान्य सवाल पूछे जाते हैं। इस टेस्ट के पास करने के बाद लर्निंग लाइसेंस जारी हो जाता है। इसके एक से छह माह के अंदर स्थायी लाइसेंस बनवा सकते हैं, मगर उसके लिए आवेदन के बाद विभागीय अधिकारियों को बकायदे ट्रैक पर वाहन चलवाकर देखना होता है।
जिले में ड्राइविंग ट्रैक नहीं बना है। फिर भी जहां तक संभव होता है आवेदकों का टेस्ट लिया जाता है। ट्रैक बनाने के लिए जमीन चिह्नित की जा रही है। फिलहाल पीपीपी माॅडल पर भी ड्राइविंग ट्रैक बनाने के लिए शासन स्तर से ऑनलाइन प्रक्रिया चल रही है। - धनवीर यादव, एआरटीओ प्रशासन।
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