सोनभद्र/सलखन। जिले में सोमवार को दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली। रॉबर्ट्सगंज के साथ ही कई इलाकों में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। दक्षिणांचल के कुछ स्थानों पर मटर के दाने के बराबर ओले गिरे। बदले मौसम और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर जिन किसानों की दलहन-तिलहन की फसलें पककर तैयार हो गई है, वे ज्यादा परेशान हैं। वहीं गेहूं के फसल के लिए बारिश अच्छी बताई जा रही है।
रॉबर्ट्सगंज के साथ ही आसपास के इलाकों में सोमवार से मौसम साफ रहा। दोपहर में उमस की वजह से लोग बेचैन दिखे। शाम करीब पांच बजे रॉबर्ट्सगंज समेत आस-पास के इलाकों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश हुई। बारिश से गेहूं और सब्जी की खेती किए किसान खुश दिखे, जबकि दलहन एवं तिलहन के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई है। धंधरौल बांध से लगते इलाके में भी हल्की बारिश हुई। सलखन: बेमौसम बारिश और तेज हवा से सरसों, अरहर तथा आम के बौर प्रभावित होने की खबर है। गुरमा, मारकुंडी, केवटा, सलखन, बेलछ, रुदौली, मकरीबारी, रजधन, पइका, बघनार और भभाईच जैसे पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में खेत-खलिहानों में रखी फसल के नुकसान की आशंका है। वहीं चोपन, ओबरा और हाथीनाला सहित कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि कहीं-कहीं तेज आंधी के साथ अच्छी बारिश होने की खबर है। अनपरा भाट क्षेत्र के किसान गौरीशंकर तिवारी, नीरज, महेश आदि किसानों का कहना है कि यदि एक-दो दिन और बारिश जारी रही तो सरसों की फसल पर व्यापक असर पड़ सकता है। वहीं खेतों में खड़ी चना और फूल ले रही अरहर (रहर) की फसल भी प्रभावित होने का खतरा है। अधिक पानी गिरने से फूल झड़ने और उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है।
4.8 डिग्री तापमान लुढ़का
बारिश के बाद 24 घंटे में न्यूनतम पारा में 4.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र चुर्क के प्रेक्षक राजन सिंह के मुताबिक सोमवार को न्यूनतम पारा 15.0 और अधिकतम पारा 28.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ। इसके मुकाबले रविवार को न्यूनतम पारा 19.8 और अधिकतम पारा 28.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था।
ओलावृष्टि, बारिश होने से लौटी ठंड
म्योरपुर। इलाके में सोमवार की शाम को तेज आंधी और बारिश के साथ हुई जमकर ओलावृष्टि से एक बार फिर ठंड लौट आई। मौसम में आए इस बदलाव से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं ओलावृष्टि और जलभराव ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। शाम करीब चार बजे के बाद आसमान में काले बादल छा गए और तेज हवाएं चलने लगीं। देखते ही देखते तेज बारिश शुरू हो गई, जिसके साथ ओले गिरने लगे। करीब आधे घंटे तक चली आंधी-बारिश से सड़कों पर पानी भर गया।
आंधी के बाद हुई बारिश, ओले गिरने से क्षति
शक्तिनगर में कम तो बीना क्षेत्र में जमकर ओले गिरे। ओलावृष्ट व बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। पेड़ पौधों की डलिया टूटने से बीना कालोनी सहित कई क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। सीमा से सटे मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इसके चलते चना, मटर, सरसों, आम, महुआ, साग सब्जियों को नुकसान पहुंचा।
बारिश की वजह से सरसों के फूल झड़ सकते हैं। करीब एक सप्ताह तक मौसम में बदलाव और बदली रहने पर माहो (कीट) लगने का खतरा रहता है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। - वीरेंद्र कुमार, उप कृषि निदेशक।