सोनभद्र। मांची थाना क्षेत्र के एक नाबालिग को प्रेमजाल में फंसाकर कुछ नहीं होने देने, जो कहेगी वह उसे दिलाने, अच्छे जीवन का सपना दिखाकर जयपुर ले जाया गया। जाते वक्त पुलिस के चंगुल से बचने के लिए पीड़िता को 24 घंटे तक जंगल में रखे रहा। प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी मिली तो 25 दिन बाद जयपुर से लाकर सोनभद्र छोड़ दिया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओमकार शुक्ल की अदालत ने इसे खासा गंभीर मसला माना और एक नाबालिग के विरुद्ध गंभीर लैंगिक अपराध मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। मांची थाना क्षेत्र से 12 जुलाई को 14 वर्षीय नाबालिग लापता हो गई थी। पिता ने थाने पहुंचकर खोड़ैला निवासी श्रीकांत चेरो के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। प्राथमिकी दर्ज करने के 25 दिन बाद पीड़िता बरामद हुई तब पता चला कि प्रकरण प्रेम संबंध का है। पीड़िता ने दर्ज कराए बयान में कहा कि आरोपी ने उससे कहा था कि वह उसे कुछ नहीं होने देगा।
वह जो कहेगी उसे दिलाएगा.. यह कहकर उसे साथ ले गए। 24 घंटे तक लोढ़ी के जंगल में रखा। इसके बाद जयपुर ले गया। वहां उसे एक कमरे में रखकर 25 दिन तक यौन शोषण करता रहा। जब उसे किसी ने प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी तब उसने सोनभद्र लाकर छोड़ दिया। न्यायालय ने कहा कि लगाए गए आरोप काफी गंभीर प्रकृति के हैं और यह अपराध एक नाबालिग के साथ किया गया है। इसलिए फिलहाल जमानत अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।