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Sonbhadra News: मानसून की बेरुखी से घट गया रिहंद का जलस्तर, यही हाल रहा तो बिजली परियोजनाओं के लिए खड़ा हो सकता है संकट

Sun, 10 Jul 2022 01:54 PM IST
उत्पल कांत संवाद न्यूज एजेंसी, सोनभद्र

सार

एशिया के विशालतम जलाशयों में एक रिहंद बांध का जलस्तर शनिवार को 838.3 फीट दर्ज किया गया। जल्द अगर मानसून का रुख नहीं बदला तो आने वाले दिनों में रिहंद के साथ ही अन्य कोल आधारित बिजली परियोजनाओं के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 
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रिहंद बांध - फोटो : फाइल
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विस्तार
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एशिया के विशालतम जलाशयों में एक रिहंद बांध का जलस्तर फिर से खिसकने लगा है। पिछले दिनों रिहंद के कैचमेंट एरिया में झमाझम बारिश से जलस्तर में तीन इंच का इजाफा हुआ था, लेकिन कई दिनों से चिलचिलाती धूप और गर्मी के कारण जलस्तर में एक इंच की कमी दर्ज की गई। रिहंद का जलस्तर 838.1 फीट पर आ गया था।

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बीते दिनों रिहंद कैचमेंट एरिया में बारिश ने जलस्तर में तीन इंच का इजाफा किया था। इसके बाद रिहंद का जलस्तर 838.4 फीट हो गया था, लेकिन मौसम ने जब दोबारा से बेरुखी दिखाई तो जलस्तर घटने लगा। शनिवार को रिहंद का जलस्तर 838.3 फीट दर्ज किया गया। रिहंद के अधिकारियों की मानें तो जैसी बारिश की उम्मीद थी, उसका 10 फीसदी भी बारिश रिहंद के कैचमेंट एरिया में नहीं हुई है।

जल्द अगर मानसून का रुख नहीं बदला और राज्यों में बारिश प्रारंभ नहीं हुई तो आने वाले दिनों में रिहंद के साथ ही अन्य कोल आधारित बिजली परियोजनाओं के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। पिछले वर्ष जून में हुई वर्षा से रिहंद के जलस्तर में इजाफा हुआ था। जुलाई के अंतिम सप्ताह में रिहंद का जलस्तर 845.9 फीट था। 

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न इंद्रदेव की मेहरबानी न नहरों में पानी

आषाढ़ माह बीतने को है मगर माकूल बारिश के अभाव में खेत अब भी प्यासे हैं। धान, उड़द, तिल की बोवाई तमाम किसान अभी तक नहीं कर पाए हैं और जिन्होंने नर्सरी डाल दी थी अब उसे बचाने के लिए वह आसमान निहार रहे हैं। उमड़-घुमड़ कर लौटते बादलों को देख किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। नहरों में भी पानी नहीं है।

आषाढ़ माह से ही वर्षा काल की शुरुआत मानी जाती है। किसान धान व खरीफ फसलों की खेती भी शुरू कर देते हैं। जून के अंत तक नर्सरी डालकर किसान रोपाई की तैयारी में जुटते हैं। इस बार पर्याप्त बारिश न होने से खेतों की नमी गायब है। खेत तैयार करने का मौका भी किसानों को नहीं मिला है।

ऊंचाई वाला क्षेत्र होने के कारण एक-दो दिन बारिश हुई भी तो खेतों में रुकने के बजाय पानी नालों से होते हुए नदियों में बह गया। खेतों की प्यास न बुझ पाने से किसानों की खेती प्रभावित है। पानी के अभाव में धान की नर्सरी, मिर्च, बैंगन, तिल की खेती प्रभावित हो रही है। बादलों को निहारते किसान आजीविका को लेकर काफी चिंतित हैं। 
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जुलाई महीने तक खेतों में खरीफ की भदई फसल मक्का, अरहर, उर्द, तिल के साथ प्रसिद्ध मिर्ची, टमाटर के लिए हलचल तेज हो जाती है, मगर इस बार सब तरफ मायूसी छाई हुई है। किसान इंद्रजीत, नीरज, रमाकांत, अंजनी, ओम आदि का कहना है कि बारिश में देर हो रही है दूसरी ओर अभी तक नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। इससे किसानों की समस्या और बढ़ गई है।

अगर नहर में पानी आ गया होता तो किसान पंप से कम से कम से धान की नर्सरी तो बचा लेते। यह विडंबना ही है किसी कोई प्रतिनिधि भी अब तक इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा। अगर बंधे में पानी कम है तो लिफ्ट का ही पानी चलना चाहिए। बिजली आपूर्ति भी रोस्टर के तहत न मिलने से निजी साधन वाले किसानों को भी राहत नहीं मिल पा रही।
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