दुष्कर्म और छेड़खानी के एक मामले में शनिवार को सुनवाई के दौरान पीड़िता कोर्ट में मुकर गई। उसने आरोपियों को पहचानने से भी मना कर दिया। साफ कहा कि उसे पढ़ना-लिखना नहीं आता। वकील ने सादे कागज पर अंगूठा लगवाया था। उन्होंने जैसा बताया था, तब बयान दिया था। पीड़िता के इस बयान के बाद अपर सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट आबिद शमीम की कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।
ये है मामला
मामला रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र का है। अनुसूचित जाति की महिला ने आरोप लगाया था कि अगस्त 2013 में गांव के एक व्यक्ति से मजदूरी को लेकर विवाद हुआ था। उसके ललकारने पर वहां मौजूद करवनिया निवासी दो, रामपुर बरकोनिया के गिरिया और चोपन के भभाइच निवासी दो अन्य सहित कुल पांच लोग आए। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसके कपड़े फाड़ दिए। पति और देवर के पहुंचने पर आरोपी भाग गए।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दुष्कर्म, छेड़छाड़, एएसी-एसटी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों के विरुद्ध छेड़खानी सहित अन्य धाराओं में चार्जशीट दायर की।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष अपने आरोपों को साबित नहीं कर सका। पीड़िता भी पूर्व में दिए गए बयान और तहरीर में कही बातों से मुकर गई। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।