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शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन धीमा

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सोनभद्र। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद शिक्षकों के नियुक्ति की शुरू हुई जांच ठंडे बस्ते में चली गई है। एक माह पूर्व शुरू हुई जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। करीब आठ से नौ हजार शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन के लिए भेजे गए हैं, लेकिन अब तक महज 40 फीसदी का सत्यापन हुआ है। शेष के सत्यापन चल रहा है।
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प्रदेश में एक महिला के कई जिलों में शिक्षा विभाग में नौकरी का खुलासा होने के बाद सरकार ने शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन का आदेश दिया है। 2012 से अब तक हुई नियुक्ति में शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की जानी है। इसके तहत शिक्षकों की पांच बार हुई हर भर्ती के अलावा उर्दू शिक्षकों की भर्ती और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के शिक्षकों समेत अन्य स्टाफ के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि सभी शिक्षकों ने सत्यापन के लिए अपने शैक्षिक प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिए हैं। एडीएम कार्यालय में शिक्षकों के शपथ पत्र के साथ भेजा गया है। एडीएम स्तर से उसकी जांच की जा रही है।
उधर अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि करीब आठ से नौ हजार शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों को सत्यापन के लिए भेजा गया है। साढ़े तीन हजार प्रमाण पत्रों का सत्यापन हो चुका है। उसकी रिपोर्ट आ गई है। फिलहाल कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। जांच की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही अन्य शिक्षकों की जांच रिपोर्ट आ जाएगी, उसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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दिव्यांगों के प्रमाण पत्र की रिपोर्ट नहीं मिली
सोनभद्र। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि शिक्षकों के शैक्षिक व अन्य प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान चार दिव्यांगों के दिव्यांग प्रमाण पत्र गड़बड़ मिले थे। वह प्रमाण पत्र मुख्य चिकित्साधिकारी को सौंप दिये गए थे ताकि उसकी सही रिपोर्ट मिल सके। लेकिन सीएमओ की ओर से अब तक रिपोर्ट नहीं मिल सकी है।
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