औड़ी-शक्तिनगर फोरलेन पर बिखरी राख के बाद उड़ती धूल। संवाद
अनपरा। दो दिनों ऊर्जांचल की हवा दिल्ली से भी खतरनाक श्रेणी में पहुंच गई है। शनिवार और सोमवार को क्षेत्र की वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार दर्ज किया गया। प्रदूषित हवा लोगों के फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है। सांस के रोगियों की समस्या बढ़ गई है।
ऊर्जांचल में कोल व तापीय परियोजनाओं की दो दर्जन से अधिक इकाइयां हैं। कोल खदानों और परिवहन के दौरान उससे उड़ने वाली कोयले की धूल और तापीय परियोजनाओं के चिमनियों से निकलने वाले धुएं से क्षेत्र की हवा आम दिनों में भी प्रदूषित ही रहती है। कुछ सालों में तापीय परियोजनाओं से निकलने वाले राख का परिवहन में मिली छूट से सड़कों पर हाईवा, ट्रेलर और ट्रकों से राख परिवहन किया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। इस कारण अब आम दिनों में भी केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की ओर से जारी रिपोर्ट में ऊर्जांचल का वायु गुणवत्ता 200 के आसपास ही बताता है, जो दिल्ली के वायु गुणवत्ता के लगभग बराबर ही रहता है।
मार्च माह के शुरुआत में ऊर्जांचल का वायु गुणवत्ता सूचकांक 184 दर्ज किया गया, जबकि दिल्ली का 191 था। शनिवार को क्षेत्र की वायु गुणवत्ता 303 दर्ज किया गया, जबकि दिल्ली में 246 दर्ज की गई। वहीं रविवार को वायु गुणवत्ता 320 दर्ज की गई, जबकि दिल्ली की 247 दर्ज की गई। वहीं सोमवार की शाम वायु गुणवत्ता सूचकांक 335 दर्ज की गई। 300 के पार वायु गुणवत्ता को बेहद ही खतरनाक माना जाता है। इस कारण कोयले, धूल व राख के कण हवा के सहारे लोगों के फेफड़ों में जाकर उसे नुकसान पहुंचा रही है। वायु की गुणवत्ता को सुधारने के लिए
मौसम में बदलाव के कारण दो दिनों से कोहरा पड़ रहा है और हवा नहीं चलने के कारण वायु गुणवत्ता खराब हुई है। मौसम सामान्य होने और हवा चलने पर वायु गुणवत्ता में स्वत: ही सुधार हो जाएगा। -आर.के. सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी सोनभद्र।