अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण 14 और 18 सितंबर की दो बैठकें स्थगित होने के बाद से ही सदस्यों में असंतोष था। लिहाजा हंगामे के आसार को देखते हुए सुबह से ही परिसर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। एक खेमे की ओर से किसी भी प्रतिनिधि के बैठक में हिस्सा न लेने देने की चेतावनी के चलते दरवाजे बंद रखे गए। छह अगस्त को हुई बैठक की पुष्टि के बाद कार्यवाई आगे बढ़ते ही सदस्य हंगामा मचाने लगे।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनिल यादव ने बिना प्राक्कलन तैयार कराए निर्माण कार्यों के लिए बजट स्वीकृत कराने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जब तक प्राक्कलन नहीं तैयार होता, यह कैसे स्पष्ट होगा कि किस कार्य पर कितनी राशि खर्च होगी। किस सड़क पर काम कराया जाना है, किस सदस्य का कौन सा प्रस्ताव स्वीकृत किया जा रहा है, इसकी पूरी जानकारी पटल पर रखी जाए।
सपा से समर्थित अन्य सदस्यों ने भी इस पर सहमति जताई। हालांकि सत्ताधारी दल के सदस्यों की संख्या अधिक होने से आपत्ति को दरकिनार कर दिया गया। निर्माण व नियोजन समिति की पिछले दिनों हुई बैठक को भी अवैधानिक बताया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सफाई सहित अन्य मुद्दों पर भी संबंधित अफसरों से जवाब मांगा गया। सीडीओ डॉ. अमित पाल शर्मा ने सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।
पांच हजार रुपये तक आकस्मिक व्यय को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष राधिका पटेल ने की। अपर मुख्य अधिकारी प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए तकरीबन 39 करोड़ की कार्ययोजना मंजूर हुई है। कुछ सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई, मगर बहुमत के सदस्यों की सहमति से इसे पारित कर लिया गया। अब जल्द ही निर्माण कार्यों के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर कार्य आरंभ कराया जाएगा।