पुल के अभाव में ग्रामीणों को बूथ तक पहुंचने के लिए डोडहर, बीजपुर, नेमना, जरहा, पिंडारी, झीलों आदि गांव से होते हुए करीब 20-21 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। दोनों तरफ की यह दूरी 40 किलोमीटर से भी ज्यादा है। ग्राम प्रधान इजाजत शेख ने बताया कि हर चुनाव में यह दिक्कत रहती है। इसके लिए कई बार इस टोले के लिए अलग बूथ बनवाने की मांग की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
पंचायत चुनाव में प्रत्याशी स्थानीय होने के कारण ग्रामीणों को वाहन या नाव की सुविधा मिल जाती है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कई बार ग्रामीणों को खुद के भरोसे ही वोट देने जाना पड़ता है। गांव के बीएलओ रहे त्रिभुवन सिंह ने बताया कि नाव का सहारा लेने पर भी ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी राकेश सिंह ने कहा कि मामला हमारे संज्ञान में नहीं था। अगर ऐसी समस्या है तो तहसीलदार को मौके पर भेजकर जानकारी कराएंगे। ग्रामीणों को वोट देने के लिए हर संभव सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
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डूमरचुआ गांव की महिलाएं
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ग्रामीणों को कोटे की दुकान से राशन लेने के दौरान भी ऐसी ही समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसके चलते उन्हें कई बार अपनी दिहाड़ी मजदूरी भी छोड़नी पड़ती है। यही हाल अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए प्रधान और सेक्रेटरी तक पहुंचने के लिए भी करना पड़ता है। पिछले दिनों इसके लिए गांव के लोगों ने ब्लॉक व तहसील कार्यालय पर पहुंचकर मांग भी उठाई थी, फिर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया।