दुआ करिए कि आपको ऐसी कोई बीमारी न हो, जिसमें अल्ट्रासाउंड कराने की जरूरत पड़े। जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है, लेकिन यहां भीड़ के कारण नंबर लगाने के बाद डेढ़ से दो महीने तक का इंतजार करना पड़ेगा।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन आठ सौ से ज्यादा की ओपीडी है। उसमें करीब सौ से डेढ़ सौ मरीजों का अल्ट्रासाउंड चिकित्सकों की ओर से लिखा जाता है, लेकिन केंद्र पर मात्र 50 मरीजों की ही जांच हो पाती है।
अस्पताल में अब मरीजों को 29 अक्तूबर की तिथि मिल रही है। ऐसे में 1600 से अधिक मरीजों की वेटिंग है। जिले के चार सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध है, लेकिन जांच की सुविधा सिर्फ जिला अस्पताल में ही है। यहां भी कोई स्थाई रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। व्यवस्था जुगाड़ के भरोसे चल रही है।
एक जेआर प्रशिक्षण पर हैं और निजी केंद्रों के रेडियोलॉजिस्ट को एक-एक दिन के लिए अस्पताल से संबंद्ध किया गया है। निजी डॉक्टर होने के कारण उन पर किसी का जोर भी नहीं है।
कई बार तय तिथि पर भी सुबह से अस्पताल पहुंचने के बाद मरीजों को डॉक्टर का घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार निजी केंद्रों से चिकित्सक की बजाय टेक्नीशियन भेज दिए जाते हैं। दोनों मिलकर सिर्फ 40 से 50 लोगों की ही जांच कर पाते हैं।
अल्ट्रासाउंड की दोनों मशीनें खराब, व्यवस्था बेपटरी
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की दो मशीने हैं। एक मशीन एक सप्ताह पूर्व खराब हो गई थी। प्रबंधन ने इसके मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया। इस बीच मंगलवार की सुबह दूसरी मशीन भी खराब हो गई। ऐसे में अब जांच बिल्कुल ठप है। मंगलवार को मशीन खराब होने के कारण डेढ़ माह बाद नंबर आने पर भी 50 मरीज लौट गए। बुधवार को भी यही स्थिति रही। टेक्निकल टीम एक मशीन को ठीक करने का प्रयास कर रही है, जिसका पार्ट्स मिर्जापुर भेजा गया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार 28 अक्तूबर 2024 को 40 मरीजों को नंबर दिया गया है। ये वह मरीज हैं, जो बुधवार को जांच के लिए पहुंचे थे। अब 29 अक्तूबर को नंबर देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीनें
जिले के सरकारी अस्पतालों में अब एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। सीएचसी चोपन, वैनी, घोरावल सहित अन्य स्थानों पर दो साल से अल्ट्रासाउंड मशीन आई हैं। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने से इनका संचालन ठप पड़ा है। विभाग के सुस्त रवैए के चलते आमजन निजी लैब में जाकर महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करने को मजबूर है।