बुखार का भी ट्रेंड बदल गया है। वायरल की चपेट में आने वालों में भी टाइफाइड, मलेरिया जैसे लक्षण दिख रहे हैं। परेशान होकर वह जांच करा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट में कुछ नहीं निकल रहा। परेशान मरीज अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। डॉक्टर उन्हें दवा के साथ खान-पान में सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो महज 21 दिन के दस्तक अभियान में ही 5000 से अधिक बुखार के मरीज पाए जा चुके हैं। अगस्त में भी मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। टाइफाइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महज मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना लगभग दो सौ मरीज बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। उसमें 15 से 20 मरीज टाइफाइड पीड़ित पाए जा रहे हैं। इस आंकड़े पर ध्यान दें तो मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाला लगभग हर 10वां मरीज टाइफाइड के संक्रमण से पीड़ित पाया जा रहा है। मलेरिया के भी मरीजों का भी मिलना शुरू हो गया है। दो दिन पूर्व एक मरीज में डेंगू की भी पुष्टि हुई थी। बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने वाले बुखार के ज्यादातर मरीजों में टाइफाइड सरीखे लक्षण पाए जा रहे हैं। स्थिति को देखते हुए डॉक्टर इसकी जांच भी करा रहे हैं लेकिन कई मामलों में बुखार पुराना होने के कारण सही स्थिति सामने नहीं आ पा रही है। इसके चलते लक्षणों के आधार पर मरीजों का उपचार करना पड़ रहा है।
सामान्य बुखार के मरीजों में भी गिर रहा प्लेटलेट्स
तीन दिन पहले एक मरीज में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। सामान्यतः डेंगू का अनुमान प्लेटलेट्स के आधार पर लगाया जाता है लेकिन जिले में बुखार का जो हालिया ट्रेंड है, उसमें टाइफाइड, वायरल (टाइफाइड-मलेरिया की पुष्टि न होने वाला बुखार) के मरीजों में भी प्लेटलेट्स के गिरावट की स्थिति बन रही है। इसके चलते डॉक्टर भी कोई मरीज सामान्य बुखार पीड़ित है या डेंगू का संदिग्ध मरीज, इसको स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। असमंजस की स्थिति को देखते हुए जिन मरीजों में टाइफाइड, मलेरिया की पुष्टि नहीं हो रही है। उनमें लक्षण आधारित उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है।
सिर्फ एक-दो रिपोर्ट पर नहीं हो सकती स्थिति स्पष्ट, सावधानी जरूरी :
टाइफाइड एक ऐसा बुखार है जिसकी स्थिति सिर्फ एक-दो रिपोर्ट पर नहीं दी जा सकती। सामान्यतः ब्लड कल्चर या विडाल टेस्ट कराया जाता है लेकिन इसके लिए एक निर्धारित अवधि का रहना जरूरी है। ऐसा न होने पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती। अगर मरीज लक्षण आधारित उपचार से ठीक नहीं होता, तब स्थिति जानने के लिए टाइफी डॉट, स्टूल या यूरिन कल्चर टेस्ट का सहारा लेना पड़ता है जो सामान्यतः सभी जगह उपलब्ध नहीं हो पाता। इसको देखते हुए लोगों से खान-पान, पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने की अपील की जा रही है।
बुखार पीड़ितों में इस तरह के मिल रहे लक्षण :
सिरदर्द, बदन दर्द, थकान, जोड़ों में दर्द, कंपकंपी, पेट में दिक्कत, मुंह में कड़वापन, कभी-कभी तेज बुखार की स्थिति बन रही है। इसको देखते हुए लोगों से ताजा भोजन, उबले हुए या अच्छी तरह से फिल्टर किए हुए पानी के सेवन की ही सलाह दी जा रही है। कहा जा रहा है कि अगर किसी तरह की दिक्कत है तो तत्काल नजदीकी चिकित्सक-स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
वर्जन
बदलते मौसम और खान-पान की खराब स्थिति के चलते टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ी है। ज्यादातर मामलों में टाइफाइड-मलेरिया न निकलने के कारण लक्षण आधारित उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि वह खान-पान में सतर्कता बरतें और शुद्ध पानी का सेवन करें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। - डॉ. राहुल सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज।
संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान के दौरान मरीजों को चिह्नित कर उपचार उपलब्ध कराया गया था। आगे भी सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर सतर्कता बरतने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. रमेश कुमार मिश्र, सीएमओ।