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Sonebhadra News: 22 साल में बढ़े दो विधानसभा क्षेत्र, पांच लाख मतदाता, मैपिंग बनी चुनौती

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सोनभद्र। मतदाता सूची का विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान जिले में शुरू हो गया है। बीएलओ घर-घर पहुंचकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध करा रहे हैं। करीब 22 साल बाद हो रहे प्रगाढ़ पुनरीक्षण में मतदाताओं की मैपिंग अफसरों के सामने बड़ी चुनौती है। इस अवधि में दो नए विधानसभा क्षेत्र बढ़े हैं तो बूथों की संख्या भी करीब दोगुनी हो गई है। पांच लाख से ज्यादा मतदाता बढ़ गए हैं। इनमें करीब 30 फीसदी ऐसे हैं, जिनके नाम वर्ष 2003 की सूची में नहीं थे। इनमें 18-50 साल की आयु वालों की संख्या सबसे ज्यादा है।
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पिछला प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान वर्ष 2003 में हुआ था। तब सोनभद्र में रॉबर्ट्सगंज और दुद्धी विधानसभा क्षेत्र था। इसके अलावा मिर्जापुर के राजगढ़ का आंशिक क्षेत्र भी जिले में आता था। तब जिले में 9.17 लाख मतदाता था। कुल 870 बूथों पर मतदान होता था। वर्ष 2009 में लागू हुए नए परिसीमन के बाद घोरावल और ओबरा नए विधानसभा क्षेत्र बने। भौगोलिक परिस्थितियों के साथ ही जिले की सामाजिक संरचना में भी काफी बदलाव आया है। वर्ष 2003 में ओबरा-ए परियोजना क्रियाशील थी। इसमें कार्य करने वालों हजारों कर्मचारी, श्रमिक भी परिवार के साथ यहां रहते थे। जिले की अन्य औद्योगिक परियोजनाओं में कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों व श्रमिकों के परिवार भी यहां निवासरत थे। उन्होंने मतदाता सूची में अपना नाम भी दर्ज कराया था। ओबरा-ए परियोजना के बंद होने और अन्य इकाइयों में कार्यरत लोगों ने सेवानिवृत्ति के बाद ठिकाना बदल चुका है। कुछ ऐसी ही स्थिति चुर्क की भी है। हालांकि समय-समय पर आयोग की ओर से होने वाले पुनरीक्षण कार्यक्रमों में ऐसे नामों को सूची से हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया चलती रही है, लेकिन प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम इससे बिल्कुल अलग है। इसमें नए सिरे से मतदाता सूची तैयार की जा रही है और पता, जन्मतिथि सहित अन्य जानकारियों के साक्ष्य समेत विवरण एकत्रित किए जा रहे हैं, ताकि किसी तरह के गड़बड़ी की संभावना न रहे।
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ग्रामीण इलाकों में साक्ष्य जुटाने की चुनौती

आदिवासी बहुल जिले में प्रगाढ़ पुनरीक्षण में सबसे बड़ी चुनौती सुदूर के ग्रामीण इलाकों में है। आयोग की ओर से जन्मतिथि सत्यापन के लिए हाईस्कूल के अंकपत्र को अहम माना गया है, जबकि इन इलाकों में बड़ी आबादी इस स्तर तक पढ़ी नहीं है। हालांकि पहचान के अन्य विकल्पों के रूप में बैंक, डाकघर, एलआईसी, पेंशन प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, नागरिक रजिस्टर, निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों का भी विकल्प दिया गया है।
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22 साल में हुए ये बदलाव

वर्ष 2003::

विधानसभा क्षेत्र : बूथ: कुल मतदाता



दुद्धी: 349: 383117



रॉबर्ट्सगंज: 352: 356458

राजगढ़ (आंशिक): 163: 177444

कुल: 870: 917019



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वर्ष 2025::

विधानसभा क्षेत्र : बूथ: कुल मतदाता



घोरावल: 441: 393009

रॉबर्ट्सगंज: 389: 342492

ओबरा: 324: 326500



दुद्धी: 361: 342789



कुल: 1515: 1404790

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कहां, कितनी मैपिंग हुई



घोरावल: 44.8 प्रतिशत



रॉबर्ट्सगंज: 72.33 प्रतिशत

ओबरा: 83.6 प्रतिशत

दुद्धी: 76.45 प्रतिशत



कुल: 69.29 प्रतिशत



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वर्जन...

मतदाता सूची का विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है। पहले चरण में 04 दिसंबर तक बीएलओ घर-घर पहुंचकर प्रत्येक मतदाता को दो प्रतियों में गणना प्रपत्र दे रहे हैं। इसे भरते हुए जरुरी दस्तावेज संलग्न करते हुए जमा करना है। दावे-आपत्तियों पर सुनवाई और निस्तारण के बाद नई मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जाता है। सभी मतदाताओं से अपेक्षा है कि वह इसमें सक्रिय सहयोग प्रदान करें। - जगरूप सिंह पटेल, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी।
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