राख बांध पर पूरी तरह से निर्मित देश की पहली परियोजना अनपरा डी की दूसरी इकाई के उत्पादन पर आने के बाद पहली इकाई को भी उत्पादन पर लेने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए मंगलवार रात नोएडा से आई स्विच यार्ड से जुड़ी विशेषज्ञों की टीम के साथ भेल और परियोजना के अधिकारियों ने देर तक मंत्रणा की।
बुधवार को कुछ टेस्ट भी किए गए, जो सफल रहे। साथ ही इकाई को लाइटअप करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। गुरुवार को इकाई के लाइटअप की उम्मीद है। इसके बाद केमिकल क्लीनिंग की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
परियोजना की दोनों इकाइयों से विद्युत उत्पादन के लिए भेल और उत्पादन निगम प्रबंधन लंबे समय से जुटा है। पांच सौ मेगावाट की दूसरी इकाई के उत्पादन पर आने के बाद अब सबकी निगाहें पहली इकाई पर टिकी हैं। अभी इकाई को उत्पादन पर आने के लिए अंतिम रूप से लाइटअप होना बाकी है। इसके पहले केमिकल क्लीनिंग और जरूरी टेस्टिंग के लिए बीच-बीच में इकाई को लाइटअप करने का क्रम जारी है।
तीन दिन पहले भी इकाई को लाइटअप किया गया था। एसिड क्लीनिंग और कुछ टेस्टिंग के बाद इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद दो दिन पहले नोएडा से आई विशेषज्ञों की टीम को इसके स्विच यार्ड के साथ ही यार्ड से जुड़ाव रखने वाले अन्य कारणों की जांच में थोड़ी बहुत खामी मिली है।
मंगलवार रात इन कमियों को दुरुस्त होने के बाद इकाई को फिर से लाइटअप की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस बार इकाई को लाइटअप करने के बाद केमिकल क्लीनिंग की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बाद सामान्य परीक्षण के लिए फिर से इकाई को बंद कर दिया जाएगा।
जब सब सही मिलेगा तो इकाई अंतिम रूप से लाइटअप की जाएगी। उधर, भेल के अनपरा डी निर्माण प्रबंधक इं. आरके श्रीवास्तव ने भी लाइटअप की कवायद जारी होने की पुष्टि की। बताया कि मार्च अंत तक इस इकाई से उत्पादन शुरू करने का प्रयास जारी है।