अनपरा में विध्य महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार।
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कटौंधी गांव में आदिवासियों की संस्कृति को बचाए रखने के लिए छह दिवसीय करमा महोत्सव का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ के साथ स्थानीय लोक कलाकारों ने करमा व शैला नृत्य की प्रस्तुति दी। इस दौरान जनजातीय समाज की बहुप्रचलित उत्सव करम डार पूजा भी की गई। कार्यक्रम के आयोजक ग्राम विकास अधिकारी रामनारायण सिंह ने कहा कि करमा जनजातीय समाज की संस्कृति का प्रतीक भी माना जाता है जो कि प्रकृति के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है।
छत्तीसगढ़ से आए गोंडी धर्म गुरू सम्मेलाल मरकाम ने करम डार पूजा का महत्व और गोंडी धर्म के इतिहास के बारे में बताया। कहा कि करमा का त्योहार आगामी फसल की अच्छी उपज, बहन-भाई के परस्पर स्नेह-बंधन और श्रमिक जीवन में नवोत्साह के आगाज का त्योहार है। इसमें जीवन में कर्म की महत्ता को स्वीकारना, पिछली गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ने का भाव शामिल है। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री विजय सिंह गौड़, ब्लॉक प्रमुख म्योरपुर मानसिंह गोंड, सुषमा सिंह, जनकधारी, सुखई सिंह पोया, लौटन सिंह पोया, रामप्रसाद, बबई सिंह मरकाम, शोभनाथ मरकाम, बसंती, रामसूरत सिंह, देवसहाय उरेती, सूबेदार सिंह आदि मौजूद रहे।