दो अक्तूबर से शुरू हुआ सड़क सुरक्षा अभियान बुधवार को समाप्त हो गया। इस अभियान के दौरान हादसों को कम करने के लिए तमाम कवायदें की गई। जागरूकता गोष्ठियां हुई। नियमों का पाठ पढ़ाया गया। उल्लंघन करने वालों के चालान भी हुए।
बावजूद हादसे कम होने के बजाय बढ़ते ही रहे। सड़क सुरक्षा पखवाड़ा में ही हर रोज अमूमन दो लोगों की सड़क हादसे में जान गई है। इसमें ज्यादातर युवा हैं। हर साल करीब तीन सौ लोगों की अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में मौत होती है।
जनवरी से अक्तूबर के बीच चार बार विशेष अभियान चलाया गया। नवंबर में फिर से सड़क सुरक्षा माह शुरू होना है। इन तमाम कवायदों के बाद भी हादसे और उसमें मरने वालों की संख्या कम नहीं हो रही। इसके पीछे यातायात नियमाें की अनदेखी प्रमुख वजह रही है। इसके अलावा खराब सड़कें, तेज गति में वाहन चलाने से भी हादसे बढ़ रहे हैं।