मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लक्ष्य पूरा करने के लिए अफसरों ने इतनी सख्ती दिखाई कि कई गांवों से शादीशुदा जोड़ों के आवेदन करा दिए गए। ऐसी कन्याओं की भी शादी कराने की तैयारी थी, जिनकी उम्र अभी 18 वर्ष पूरी ही नहीं हुई है।
नतीजा सत्यापन के दौरान ढाई सौ से अधिक आवेदन निरस्त हो गए। हालांकि इसके बावजूद चोपन ब्लॉक में तीन शादीशुदा जोड़ विवाह मंडप में फेरे लेने में सफल रहे। फर्जीवाड़े की पोल खुलने के बाद अब अफसरों के रुख को लेकर भी लोग नाराजगी हैं।
इस वर्ष शासन ने जिले में 1100 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य आवंटित किया है। हर हाल में इस लक्ष्य को पूरा करने पर अफसरों का जोर रहा है। गांवों में प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम सचिवों पर दबाव देकर अपने क्षेत्र से आवेदन कराने को कहा गया था।
ऐसे में लक्ष्य पूरा करने के लिए कम उम्र और पहले से शादी की सूचना छिपाते हुए ऑनलाइन आवेदन करा दिए गए। संयोग रहा कि पिछले वर्ष बलिया में हुए फर्जीवाड़े के चलते इस बार सत्यापन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही थी।
नतीजा बड़ी संख्या में आवेदन सत्यापन के दौरान ही निरस्त कर दिए गए। जिले के दस ब्लॉकों से योजना के तहत 915 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसमें 251 आवेदनों को कम उम्र और जोड़ों के पहले से शादीशुदा होने के कारण निरस्त किया गया था।
इसके अलावा करीब 218 आवेदन आय, आधार सहित अन्य दस्तावेजों में त्रुटियों के कारण रद्द हो गए। सबसे ज्यादा आवेदन कोन ब्लॉक में निरस्त किए गए थे। यहां कुल 89 आवेदन आए थे, जिसमें सिर्फ 26 ही विवाह के लिए पात्र पाए गए थे।
रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक में भी दो आवेदन निरस्त हुए हैं। इसमें घसिया बस्ती निवासी एक जोड़े को पहले से बच्चा था तो एक अन्य जोड़े की पंचायत में पहले ही शादी हो चुकी थी। इसी तरह अन्य ब्लॉकों में भी बड़ी संख्या में आवेदन रद्द किए गए हैं।
राज्य मंत्री के गृह ब्लॉक चोपन में हुई चूक पर जिम्मेदार मौन हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब इसका ठिकरा ग्राम सचिव पर फोड़ा जा रहा हो, लेकिन ब्लॉक के अन्य अधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं।
अवकाश पर हैं सचिव तो किसने किया सत्यापन
तीन जोड़ों के दोबारा शादी करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जोड़ों के सत्यापन की जिम्मेदारी ग्राम सचिव की थी, मगर बीमारी कारण लंबे समय से अवकाश पर हैं। बावजूद उनकी ओर से ही सत्यापन की रिपोर्ट लगाकर ब्लॉक को भेजी गई थी। अब सचिव की अनुपस्थिति में सत्यापन किसने किया, इसकी भी जांच शुरू कर दी गई है।