घोरावल विकास खंड क्षेत्र के अलग-अलग गांवों और सीमवर्ती इलाकों में बन रहे तीन पुलों का निर्माण एक दशक से ठप पड़ा है। बारिश शुरू होने के साथ ही इन इलाकों में करीब डेढ़ लाख लोगों की परेशानी बढ़ जाएगी। इसे लेकर राजनीति भी गर्म है।
वर्तमान भाजपा विधायक और सपा के पूर्व विधायक के समर्थकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। घोरावल क्षेत्र को मंडल मुख्यालय मिर्जापुर से जोड़ने वाले मार्ग से होकर धुरकरी गांव सीमा पर बकहर नदी बहती है।
नदी पर बना अंग्रेजों के जमाने का जर्जर पुल कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। पुल की जर्जर हालत को देखते हुए तत्कालीन सपा विधायक इं. रमेश चंद्र दूबे की ओर से नवंबर 2016 में यहां नए पुल के निर्माण का शिलान्यास किया गया था।
पीडब्ल्यूडी को 217.23 लाख रुपये की अनुमति मिली थी। तब पुल के लिए पांच खंभों का निर्माण भी हुआ था। इस बीच 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद से पुल का काम अधर में लटक गया। इस बीच कुछ दिनों पूर्व सपा विधायक पुल के पास पहुंचे थे।
उन्होंने फेसबुक लाइव के जरिए स्थानीय विधायक और सरकार पर निशाना साधा था। उनका कहना था कि घोरावल क्षेत्र के लोग मिर्जापुर, प्रयागराज जाने के लिए इसी पुल का उपयोग करते हैं।
बरसात के समय इस पुल पर पांच से सात फीट तक पानी चढ़ने से आवागमन ठप हो जाता है। पिछले साल भी बाढ़ से रास्ता बंद हो गया था। पूर्व में हादसे हो चुके हैं। जर्जर पुल कभी भी जवाब दे सकता है।
बरसात के दौरान यह पुल एक बार फिर बंद होने जा रहा है। ऐसे में लोग मंडल मुख्यालय कैसे पहुंचेंगे। उन्होंने पुल के निर्माण में भ्रष्टाचार और धन के बंदरबांट का आरोप लगाया है।
इसे लेकर सोशल मीडिया पर पूर्व सपा विधायक रमेश दुबे और वर्तमान विधायक अनिल मौर्य के समर्थकों के बीच बयानबाजी देखने को मिल रही है। इस बीच घोरावल से भाजपा विधायक अनिल मौर्य ने डीएम को पत्र लिखा है।
उन्होंने बेलन नदी पर अहरौरा, मुड़िलाडीह और धुरकरी में बकहर नदी पर अधूरे पुलों को लेकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में पीडब्ल्यूडी से अर्धनिर्मित इन तीनों पुलों के निर्माण कराने और मामले की जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जर्जर पुल से गुजरेगी कांवड़ यात्रा
गुप्तकाशी शिवद्वार की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा व श्रावण मेला के दृष्टिकोण से बकहर नदी का पुराना जर्जर पुल बेहद खतरनाक है। लाखों की संख्या में शिवद्वार में जलाभिषेक करने आने वाले कांवड़ियों में से ज़्यादातर मिर्जापुर के गंगा नदी से जल लेकर आते हैं। बरसात में भारी बारिश होने पर पुल दस फीट तक पानी में डूब जाता हैं। पूर्व में जलाभिषेक करने शिवद्वार आ रहे दो कांवड़िए नदी में बह गए थे।
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मुड़िलाडीह में 11 साल में नहीं बना पुल
घोरावल ब्लॉक के मुड़िलाडीह (पठकागांव) और धोवां गांव के बीच बेलन नदी पर वर्ष 2013 में पुल निर्माण की अनुमति मिली थी। 11 साल पहले शुरू हुआ पुल का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो सका है। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड की तरफ से स्वीकृत कार्य के एवज में पुल के नाम पर बेलन नदी में आठ पीलरों के अलावा कुछ नहीं है। वर्ष 2018 से पुल का काम बंद है। अधूरा पुल छोड़े जाने की शिकायत ग्राम पंचायत से लेकर आईजीआरएस पोर्टल तक की गई मगर कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। रास्ता का निर्माण नहीं हो पाने की वजह से क्षेत्र के लोगों को खड़देउर, शाहगंज के रास्ते राजगढ़ जाना पड़ता है।
अहरौरा में भी पुल अधूरा
घोरावल ब्लॉक के ही अहरौरा में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान बेलन नदी पर पुल के निर्माण को अनुमति मिली थी। पुल के कुल सात पिलर के सापेक्ष तीन का ही निर्माण कराकर ठेकेदार फरार हो गया। विभागीय अधिकारियों ने मामले में चुप्पी साध ली है। चार सालाें से काम ठप पड़ा है। इस पुल के निर्माण से एमपी के साथ ही घोरावल के कई अहरौरा, सोतिल, गुरेठ बंधा सहित अन्य गांवों को राॅबर्ट्सगंज जाने के लिए दस किमी दूरी कम तय करनी पड़ती।
धुरकरी में बकहर नदी पर पुल का निर्माण प्रांतीय खंड मिर्जापुर की ओर से किया गया है। मुड़िलाडीह में पुल का काम काफी पुराना है। पुरानी पत्रावली निकलवाई गई है। बजट के अभाव में काम रुका था। इसके लिए जरूरी प्रक्रिया की जाएगी।
-शैलेश सिंह ठाकुर, एक्सईएन, प्रांतीय खंड।