अनपरा। डिबुलगंज स्थित संयुक्त चिकित्सालय में सुविधाओं के अभाव में मरीजों को इलाज में भारी परेशानी हो रही है। यहां भर्ती मरीजों को भोजन तक की व्यवस्था नहीं हो पाती है। जांच व इलाज के लिए उपकरण तक नहीं है।
डिबुलगंज में करीब तीन दशक पूर्व 100 बेड के संयुक्त चिकित्सालय का निर्माण कराया गया है। यहां ना मरीजों के लिए कोई सुविधा है और ना ही डॉक्टर के लिए उपकरण। स्टाफ की कमी भी जांच व इलाज में बाधा उत्पन्न करती है। अस्पताल में बिजली की व्यवस्था के लिए 20 किलोवाट का सोलर प्लेट और जेनरेटर भी है। सोलर प्लेट खराब है और तेल ना होने की वजह से जनरेटर चलता नहीं। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और उनके तीमारदारों को होती है। ना ही उनके भोजन की व्यवस्था है और ना ही परिजनों के लिए शौचालय की। मजबूरी में परिजन अस्पताल से जल्दी छुट्टी लेकर घर चले जातें हैं। हाल ही में एनसीएल ने सीएसआर के माध्यम से 2.91 करोड़ स्पताल की मरम्मत और सुंदरीकरण पर खर्च किए हैं, लेकिन स्टाफ एवं संसाधनों के अभाव में क्षेत्र के लोगों को सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
अस्पताल में नही है रोगी कल्याण समिति
अस्पताल के भोजन एवं अन्य खर्च के लिए रोगी कल्याण समिति का गठन किया जाता है। डिबुलगंज संयुक्त चिकित्सालय में रोगी कल्याण समिति का गठन ही नहीं किया गया है। फंड न होने के कारण अस्पताल में मरीजों के लिए न भोजन की व्यवस्था हो पाती है और न ही शौचालय व परिसर के साफ-सफाई की। ऐसे में मरीज अस्पताल में भर्ती नहीं होना चाहते। सक्षम लोग निजी या बैढ़़न के ट्राॅमा सेंटर चले जाते हैं और जो सक्षम नहीं है वह शाम तक छुट्टी लेकर घर चले जाते हैं।
दो विशेषज्ञ डॉक्टर लेकिन उपकरण नहीं
अस्पताल में डॉ. अनिता यादव दांत और डॉ. प्रणव टंडन आंख के डॉक्टर हैं। दांत के डॉक्टर की तैनाती हुए दो वर्ष से अधिक हो गए और आंख के डॉक्टर की हाल ही में तैनाती की गई है। लेकिन अभी तक उपकरण की व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण दोनों डॉक्टर जनरल दवाएं ही लिखते हैं।
अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन टेक्निशियन नहीं
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन टेक्निशियन न होने से दो साल से धूल फांक रही है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से सिजेरियन प्रसव में समस्या आती है। इस कारण महिलाएं निजी अस्पतालों का रुख करती हैं। अस्पताल में लैब टेक्निशियन भी नहीं है। अकेले सहायक लैब की जांच के साथ रिपोर्ट तैयार करते हैं।
अस्पताल की समस्याओं से पूर्व में कई बार सीएमओ कार्यालय पर लिखित व मौखिक अवगत करा दिया गया है। जितने संसाधन हैं, उतने में मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधाएं दी जा रहीं हैं। - डॉ. रवि प्रताप सिंह, अधीक्षक संयुक्त चिकित्सालय डिबुलगंज।