सोनभद्र। लोढ़ी स्थित पचास शय्या वाले एकीकृत आयुष चिकित्सालय में तीन महीने से जरूरत की दवाएं नहीं हैं। इस कारण लोगों को बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। इससे यहां मरीजों की संख्या भी घट रही है। अस्पताल में इन दिनों रोज 160 से 170 मरीज मरीज आ रहे हैं। पहले मरीजों की संख्या 200 के पार थी। ओपीडी में 20 फीसदी की गिरावट आई है।
करीब तीन साल पूर्व लोढ़ी में 50 शय्या का एकीकृत आयुष चिकित्सालय बना था। इसमें आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथ के चिकित्सक हैं। ओपीडी में सामान्य रोग, स्त्री रोग, शरीर दर्द, पेट संबंधी मरीज ज्यादा आ रहे हैं। लेकिन कब्ज की दवा त्रिफला चूर्ण, लवण भास्कर व अभयारिष्ट लंबे समय से अस्पताल में नहीं है। महिलाओं को माहवारी संबंधी समस्याओं में दिए जाने वाली कुमारी अश्वकुमारी, अशोकारिष्ट दवा भी नहीं है। यहां 62 प्रकार की आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए, मगर आठ ही हैं। 61 यूनानी औषधियों में से 3 ही उपलब्ध हैं।
राॅबर्ट्सगंज निवासी सुरेश ने बताया कि मां के घुटने के दर्द का इलाज करा रहे हैं। अब दवा नहीं मिल रही है। बाहर दवाएं महंगी मिलती है। विजय, रामबली, रोहित सहित अन्य तीमारदारों ने अस्पताल में दवा उपलब्ध कराने की मांग की। अस्पताल में यूनानी दवाओं का भी तीन महीने से टोटा है।
इन आयुर्वेद दवाइयों की कमी
अभयारिष्ट, अमृतारिष्ट, अर्जुनारिष्ट, अशोकारिष्ट, अश्वगन्धारिष्ट, दशमूलारिष्ट, द्राक्षासव, खदिरारिष्ट, लोहासव। हरिद्राखंड, वासावलेह, दशमूल क्वाथ, फलत्रिकादि क्वाथ, तृणपंचमूल क्वाथ, वरूणादि क्वाथ चूर्ण कैशोर गुग्गुल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कांचनार गुग्गुल, पुनर्नवादि गुग्गुल, योगराज गुग्गुल, अविपत्तिकर चूर्ण, भास्करलवण चूर्ण, हिंग्वाष्टक चूर्ण भी नहीं है। सितोपलादि चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, सुदर्शन चूर्ण भी नहीं है।
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वर्जन:
कुछ समय से दवाओं की कमी बनी हुई है। इसके लिए पत्राचार किया गया है। अप्रैल के पहले सप्ताह तक दवाओं की आपूर्ति की उम्मीद है। -राजेश सिंह चंदेल, प्रभारी अधीक्षक आयुष अस्पताल।