शक्तिनगर में ज्वालामुखी मंदिर मार्ग पर गड्ढे में फसा ट्रेलर।संवाद
शक्तिनगर। ज्वालामुखी मंदिर के करीब गड्ढे में ट्रेलर फंसने से राख लोड ट्रेलरों की रविवार दोपहर लंबी कतार लग गई। इसके चलते मंदिर पहुंचने वाले दर्शनार्थियों को दुश्वारियां झेलनी पड़ी। दर्शन के लिए पहुंचे भक्त व्यवस्था को कोसते नजर आए और कहा कि आस्था के केंद्र तक पहुंचने वाले मार्ग की मरम्मत को लेकर जिम्मेदार उदासीन हैं।
पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में स्थित पावर प्रोजेक्ट से उत्सर्जित राख की ढुलाई ज्वालामुखी मंदिर मार्ग से शुरू करा दी गई है। मप्र में मौजूद एनटीपीसी विंध्याचल पावर प्रोजेक्ट से निकलने वाले राख भरे ट्रेलर शक्तिनगर के रास्ते पुनः मध्यप्रदेश में प्रवेश कर रहे हैं। यूपी क्षेत्र में ओवरलोड राख लेकर चक्कर लगाने वाले ट्रक ट्रेलरों के पीछे की कहानी यह है कि सिंगरौली (मप्र) प्रशासन राख ढुलाई से पैदा प्रदूषण से जिला मुख्यालय को सुरक्षित रखना चाहता है इसलिए राख ढुलाई को अपने क्षेत्र में प्रतिबंधित कर दिया है। इसी का खामियाजा अब शक्तिनगर के रहवासियों को प्रदूषण के रूप में भुगतना पड़ रहा है। कई सीमावर्ती प्रदेशों के आस्था का केंद्र ज्वालामुखी मंदिर भी इससे अछूता नहीं रह पाया है। मंदिर परिसर के करीब ट्रक ट्रेलरों की पार्किंग स्थल बना दिया गया लेकिन चालकों व परिचालकों के लिए ना तो शौचालय निर्माण कराया गया ना तो स्नानागार इसके चलते वाहनों से संबंधित लोग खुले में शौच जाने को बाध्य होते हैं और इससे आस्था के स्थल का वातावरण दूषित होता है। बड़े वाहनों के चौबीसों घंटे परिचालन से सड़क जगह जगह धंस गई है इसके चलते मंदिर पहुंचने में भक्तों को दिक्कत पैदा हो रही है। मंदिर के प्राधिकृत पुजारी हेमंत मिश्र ने बताया कि इस संबंध में जिम्मेदार लोगों को कई बार आगाह किया जा चुका है लेकिन संबंधित गंभीर नहीं हैं। क्षेत्र के रहवासी शत्रुधन प्रसाद, मनोनीत रवि, अनिल, कमलेश कुमार, आदि ने भी अव्यवस्था पर आक्रोश जताया और कहा कि सड़क व प्रदूषण के मुद्दे पर सड़क पर उतरना होगा।
प्रदूषण से दुकानदार बेहाल
शक्तिनगर। क्षेत्र के प्रमुख व्यवसायिक बाजार राजीव गांधी मार्केट (पीडब्ल्यूडी मोड़) के दुकानदारी राख के प्रदूषण से तबाह हो चुकी है। होटलों पर खाना पीना तो दूर खड़ा होना मुश्किल हो गया है। व्यवसायियों का कहना है कि पहले से कोयले की धूल से दो चार हो रहे लोग राख से पैदा प्रदूषण से आजिज आ चुके हैं। कोल प्रबंधन ने पानी छिड़काव कर व्यवस्था को काफी हद तक सही करने का प्रयास किया लेकिन पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन इस मामले में उदासीन बना है।