फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonebhadra News: पनौरा में 143 पट्टों की पहेली उलझी, 3 महीने बाद भी 67 की नहीं मिली पत्रावलियां

विज्ञापन
विज्ञापन
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज तहसील क्षेत्र के पनौरा में 20 वर्ष पूर्व किए गए 143 पट़्टों की पहेली उलझ सी गई है। 2007 में मुस्लिम व्यक्तियों के नाम किए गए 67 ऐसे पट्टे पाए गए हैं जिनकी फाइल तीन माह बाद भी नहीं ढूंढ़ी जा सकी है। मार्च में पनौरा में ग्रामीणों की कराई गई खुली बैठक में भी कई गड़बड़ियां सामने आई थीं। नियमों को ताक पर रखकर, रिश्तेदारी के सिंडीकेट के जरिये बड़े पैमाने पर पट़्टा आवंटित कराए जाने का भी मामला सामने आया था। आदिवासी महिला को पत्नी की तरह रखकर उसके जरिए जमीन हथियाने की जानकारी ने जांच के लिए पहुंची टीम के भी होश उड़ा दिए थे।
विज्ञापन




सर्वे में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई थी। प्रभावित ग्रामीणों को भरोसा दिया गया था कि जल्द ही सर्वे में हुई गड़बड़ी की भी जांच कराकर उनका भौमिक हक वापस दिला दिया जाएगा लेकिन 67 फाइलों से जुड़ी पत्रावलियां मंजूरी के बाद गई कहां? इसकी जानकारी जहां अब तक नहीं मिल पाई है।

दुद्धी तहसील क्षेत्र के बघाड़ू में आदिवासी महिलाओं से शादी रचाकर उनके जरिये जमीन हथियाने का खुलासा होने के बाद जिले में किन-किन जगहों पर ऐसे मामले हैं, इसकी आंतरिक जांच कराई गई थी। इसकी जो प्राथमिक रिपोर्ट आई थी उसके आधार पर तत्कालीन डीएम बीएन सिंह ने रॉबर्ट्सगंज और ओबरा एसडीएम को पट्टा और गलत तरीके से कराए गए बैनामों की जांच के निर्देश दिए गए थे। इसी कड़ी में सदर तहसील में भी टीम गठित कर पनौरा की जांच कराई गई तो पता चला कि पनौरा में एक दो नहीं 143 पट्टे किए गए हैं। 2007 में 67 ऐसे पट्टे मिले जो सिर्फ मुस्लिम व्यक्तियों को किए गए थे। सूत्र बताते हैं कि टीम ने जब तहसील में रिकॉर्ड खंगालना चाहा तो पता चला कि तत्कालीन एसडीएम से पट्टे की स्वीकृति कराकर उसका अमलदरामद तो करा लिया गया लेकिन उसके बाद फाइल कहां गई, यह किसी को नहीं मालूम। भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने इस मसले पर 22 मार्च को सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर पत्रक सौंपा था और तत्कालीन डीएम ने 25 मार्च को पत्र जारी कर जल्द जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन




खुली बैठक में ऐसी गड़बड़ियां आई थीं सामने



सूत्रों पर भरोसा करें तो खुली बैठक के दौरान सामने आया था कि बिहार-झारखंड के तीन ऐसे परिवार हैं जो पट्टों के जरिये पनौरा के बाशिंदा बन गए हैं। एक बेटी इसके नाम पट्टा किया गया था कि वह शादी कर बिहार चली गई। वर्षों बीत गए अब तक वापस नहीं आई। एक जनजाति महिला को पत्नी की तरह रखकर उसके जरिए उसके मायके की जमीन पर कब्जे की कोशिश का भी मामला सामने आया। कई ऐसी शिकायत मिली जिसमें जमीन पर कब्जा तो आदिवासियों का है लेकिन सर्वे के समय गड़बड़ी कर नाम बाहरी लोगों के चढ़वा दिए गए।
विज्ञापन


प्रकरण की पूरी जानकारी तलब की जाएगी। जो भी गड़बडियां सामने आएंगी, उसको द़ृष्टिगत रखते हुए प्रभावी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - चर्चित गौड़, डीएम।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें