नक्सल प्रभावित रहे मांची गांव और थाने के बीच महज 200 मीटर की दूरी है, लेकिन इन दिनों ग्रामीणों को काेई भी सूचना लेकर थाने पहुंचने के लिए 50-55 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है।
पुलिस को भी कोई कार्रवाई करनी है तो इतनी ही दूरी तय कर गांव पहुंचना पड़ रहा है। यह स्थिति सिर्फ मांची गांव की ही नहीं है। आसपास के 10-12 गांव इस परेशानी से जूझ रहे हैं।
अपने थाने पर पहुंचने के लिए ग्रामीणों को दो अन्य थानों को पार करना पड़ रहा है, जबकि सीधी दूरी महज कुछ किमी है। यह स्थिति नगवां बांध में जलभराव के कारण आई है। नगवां बांध के पिछले हिस्से में मांची गांव बसा हुआ है। गांव के ठीक सामने थाना बना है।
गांव और थाने के बीच में सिर्फ 200 मीटर की दूरी है। बीच की सड़क पर एक रपटा है, जिससे होकर लोग आते-जाते हैं। इस बार भारी बारिश के कारण नगवां बांध के भरने से पानी रपटे के करीब 8-10 फीट ऊपर तक आ गया है। इससे गांव और थाने का संपर्क पूरी तरह कट गया है।
नेटवर्क विहीन इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सूचना देने के लिए ग्रामीणों को 50 किमी दूर घूमकर जाना पड़ रहा है। उनके रास्ते में रायपुर और पन्नूगंज थाना भी पड़ता है, लेकिन उनका क्षेत्र मांची होने के कारण उन्हें दिक्कतें आ रही हैं।
मांची के अलावा सूअरसोत, कजियारी, वाराडाढ़, बाकी, कोदई, बरवारी, दरेव, देवहार, नौडीहा, चरगड़ा, मड़पा, चौरा, खोडैला, बड़ेला, महुली, मझुई, सोहदाग, पनौरा आदि गांव का भी थाने से सड़क संपर्क बढ़ गया है।
खोड़ैला की प्रधान रीता देवी ने बताया कि ऊंचे पुल की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं किया गया। हर साल बरसात में नाव की व्यवस्था होती थी। इस बार यह भी नहीं है।
माची थानाध्यक्ष राम दरस राम ने बताया कि हमें अपनी चौकी सूअरसोत पर जाने के लिए 50 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है। क्षेत्र में पेट्रोलिंग के लिए 60 से 70 किमी पुलिसकर्मी घूम रहे हैं। जनता को अपनी फरियाद लेकर थाने आने में भी कठिनाई हो रही है। समस्या के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता की जा रही है।