फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonebhadra News: 34 साल की लाइब्रेरी में 879 सदस्य, पिछले 15 महीने में सिर्फ 37 जुड़े

विज्ञापन
विज्ञापन
सोनभद्र। किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता। यही कारण था कि पहले लोग घंटों किताबों में खोए रहते थे। अब सोशल मीडिया के दौर में नई पीढ़ी किताबों से दूर होती जा रही है। पुस्तकालय में जाकर किताबें पढ़ने वालों की संख्या भी कमी आई है। छपका स्थित राजकीय जिला पुस्तकालय में रोजाना बमुश्किल 30-35 लोग ही किताबें पढ़ने आते हैं। करीब 34 साल पुराने पुस्तकालय में सिर्फ 879 सदस्य हैं। इसमें पिछले 15 महीने में सिर्फ 37 सदस्य जुड़े हैं। यहां 32 हजार से अधिक किताबों का संग्रह है, मगर अधिकांश किताबें ऐसी हैं, जिसके पन्ने वर्षों से नहीं पलटे गए हैं।
विज्ञापन

जिले में राजकीय पुस्तकालय की स्थापना वर्ष 1991 में हुई थी। विभिन्न कक्षाओं के लिए उपयोगी पाठ्य पुस्तकों के अलावा ख्यातिलब्ध लेखकों की साहित्यिक कृतियां भी यहां उपलब्ध हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पत्र-पत्रिकाओं की खेप भी नियमित मंगाई जा रही है। विडंबना है कि इसे पढ़ने वालों की संख्या नहीं बढ़ रही। स्थापना काल से अब तक सिर्फ 879 सदस्य ही पुस्तकालय से जुड़े पाए हैं।
सदस्यों की कम संख्या के पीछे प्रचार-प्रसार का अभाव भी मुख्य वजह है। छपका में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के पीछे बने पुस्तकालय के बारे में बहुत से लोग अनभिज्ञ हैं। अभियान चलाकर नए सदस्य बनाने और उन्हें पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है।
विज्ञापन

पॉलिटेक्निक के छात्र अभिषेक बताते हैं कि पुस्तकालय में अच्छी किताबें हैं, लेकिन बहुत से बच्चों को इसकी जानकारी ही नहीं है। रॉबर्ट्सगंज के आदित्य का कहना है कि बाहर तेजी से निजी डिजिटल लाइब्रेरी खुल रही हैं। वहां मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं दी जा रही हैं। यहां भी इसे अपनाया जाए तो नए सदस्यों का रुझान बढ़ेगा।
ऑनलाइन किया जा रहा रिकॉर्ड
करीब डेढ़ साल पहले ही राज्यसभा सांसद हरदीप सिंह पुरी की निधि से पुस्तकालय के भवन का जीर्णोद्धार कराया गया है। नए फर्नीचर, वाटर कूलर सहित अन्य सुविधाएं दी गई हैं। किताबों के लेन-देन सहित अन्य प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए यहां भी डिजिटल तरीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है। किताबों का सारा ब्योरा ऑनलाइन किया जा रहा है। उसकी निकासी, जमा आदि का विवरण भी अब कम्प्यूटर से ही होना है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल साढ़े सात हजार किताबों का ही विवरण ऑनलाइन हो पाया है।
पांच सौ रुपये की काशन मनी जमा कर कोई भी व्यक्ति सदस्य बन सकता है। पिछले 15 महीने में 37 नए सदस्य बने हैं। लाइब्रेरी में हर तरह की किताबें उपलब्ध हैं। हर माह कॅरियर काउंसिलिंग का सत्र भी कराए जा रहे हैं, जिससे यहां आने वाले युवाओं को सही मार्गदर्शन मिल सके। - संजीव मिश्र, प्रभारी, राजकीय जिला पुस्तकालय छपका।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें