लसड़ा गांव में नियमों को दरकिनार कर हाईवे किनारे की लगभग 6 बिस्वा की कीमती जमीन अपात्रों को पट्टा किए जाने के मामले में एसडीएम सदर उत्कर्ष द्विवेदी ने लेखपाल श्वेता सिंह को निलंबित कर दिया है। नायब तहसीलदार मनोज मिश्रा, कानूनगो अवधेश तिवारी, राजस्व निरीक्षक कार्यालय कार्य राजेंद्र प्रसाद टंडन के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट डीएम को भेजी है। वहीं तहसीलदार अमित सिंह से जवाब- तलब कर वेतन भी रोक दिया गया है। प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम व सीडीओ को पत्र भेजा गया है। पट्टे के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।
गत 17 जनवरी को लसड़ा गांव के कई ग्रामीण संपूर्ण समाधान दिवस में फरियाद लेकर पहुंचे थे। एसडीएम उत्कर्ष द्विवेदी को शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि ग्राम भूमि प्रबंधन समिति ने सिरपालपुर मोड़ के पास हाईवे किनारे पानी टंकी से सटी लगभग 6 बिस्वा की करोड़ों की जमीन ऐसे लोगों को आवंटित कर दी है जिनके पास पहले से पर्याप्त जमीन मौजूद है। पात्रों को पट्टा आवंटित न किए जाने का भी आरोप लगाया। पीड़ितों ने एसडीएम को पट्टे की मांग से जुड़ी एक निस्तारण आख्या भी उपलब्ध कराई थी, जिसमें कहा गया था कि जो लोग पात्र हैं उनके संबंध में भूमि प्रबंधन समिति की बैठक में विचार-विमर्श किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप था कि ऐसा नहीं किया गया। शक जताया था कि हाईवे के निर्माण की चल रही कवायद (मुआवजे) का लाभ उठाने के लिए यह गड़बड़ी की गई है। एसडीएम ने शिकायतकर्ताओं को कार्रवाई का भरोसा दिया था। सोमवार को कार्यालय पहुंचते ही एसडीएम ने सबसे पहले पट्टे की पत्रावली तलब की। इसके बाद स्वयं मौके का निरीक्षण करने पहुंच गए। संबंधित भूखंड का जायजा लिया और आस-पास के ग्रामीणों से पूछताछ कर जरूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद कार्यालय आकर पट्टे की कार्रवाई और उससे जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया तो पता चला कि पट्टे के लिए तैयार किए नजरी नक्शे में भूखंड की स्थिति भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एसडीएम ने इसे बड़ी गड़बड़ी माना और हाईवे किनारे की करोड़ों की जमीन को गलत तरीके से हथियाने की कोशिश में सहयोग के लिए क्षेत्रीय लेखपाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। अन्य संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट डीएम को भेज दी।
इस तरह जमीन हथियाने की हुई कोशिश
नियमानुसार पट्टा आवंटन के लिए भूमि प्रबंधन समिति की बैठक और उस पर सभी सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि किसी भी सदस्य को इससे जुड़ी बैठक या ऐसी किसी भी प्रक्रिया-कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई। प्रधान और लेखपाल की मिलीभगत से गलत तरीके से प्रस्ताव तैयार करते हुए क्षेत्रीय काननूगो, राजस्व निरीक्षक कार्यालय कार्य, नायब तहसीलदार को विश्वास में लेकर कार्यवाही को आगे बढ़ाने के लिए संस्तुति करा ली गई। तहसीलदार राॅबर्ट्सगंज ने भी इसके जांच-पड़ताल की जरूरत नहीं समझी और उन्होंने आवंटन की कार्रवाई को सही ठहराते हुए चार नवंबर 2023 को पट्टा स्वीकृति की संस्तुति देते हुए फाइल आगे बढ़ा दी। इसका फायदा उठाते हुए तीन दिसंबर को पट्टा आवंटन की मंजूरी ले ली गई लेकिन जैसे ही ग्रामीण इसकी शिकायत लेकर एसडीएम के पास पहुंचे पूरा खेल उल्टा पड़ गया।
एसडीएम के स्टेनो की भूमिका की भी हो जांच
सदर तहसील के लसड़ा-अक्छोर ग्राम पंचायत में मनमाने ढंग से हुए पट्टे को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने बड़ी गड़बड़ी बताई है। उन्होंने इसकी विस्तृत जांच की मांग की। कहा कि तहसील प्रशासन ने मनमाने ढंग से अपात्र लोगों को पट्टा किया है। इस मामले में एसडीएम के स्टेनो की भूमिका भी संदिग्ध है। डाॅ. धर्मवीर तिवारी ने पिछले डेढ़ साल में हुए सभी पट्टों की जांच कराने की मांग की है। कहा
प्रकरण जैसे ही संज्ञान में आया, तत्काल इस पर कार्रवाई की गई। लेखपाल को निलंबित कर दिया गया है। नायब तहसीलदार सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई है। जो पट्टे आवंटित किए गए थे उसे भी निरस्त करने की कार्रवाई कराई जा रही है।
- उत्कर्ष द्विवेदी, एसडीएम सदर।