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Sonebhadra News: जिस गांव के लिए बनी थी पाइप पेयजल परियोजना, वहीं के घरों को नहीं मिला पानी

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सोनभद्र। भूजल में फ्लोराइड की अधिकता से फ्लोरोसिस के शिकार हो रहे लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के नाम पर सिर्फ छला गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी प्रभावित लोगों को पाइप से पानी नहीं मिली। यहां तक कि उस गांव में ही पानी नहीं पहुंच पाया, जिसके नाम पर ग्राम समूह पेयजल परियोजना का निर्माण हुआ था।
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कोन ब्लॉक के पड़रक्ष गांव का हर टोला भूजल में फ्लोराइड की अधिकता से ग्रसित है। यहां फ्लोराइड से प्रभावित परिवारों की बड़ी संख्या है। लगातार यही पानी पीने से लोगों की हड्डियां टेढ़ी हो गई हैं। कमर झुक गई है। दांत टूट गए हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी इससे ग्रसित हैं। इस गांव को पाइप लाइन से शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए वर्ष 2012-13 में ग्राम समूह पेयजल परियोजना स्वीकृत हुई थी। करीब 68 करोड़ की लागत से बनी यह परियोजना वर्ष 2015-16 में तैयार हुई। इसके माध्यम से करीब 22 किमी के दायरे में आने वाले नौ गांवों को पानी दिया जाना था। इसमें पड़रक्ष, खेमपुर, हर्रा, सलइयाडीह आदि गांव शामिल रहे। गांवों तक पाइप लाइन बिछाकर कनेक्शन भी दिए गए, लेकिन 80 फीसदी आबादी तक पानी नहीं पहुंची। इस कारण लोगों को हैंडपंप और कुएं का दूषित पानी ही पीना पड़ रहा है। परियोजना के मुहाने पर स्थित पड़रक्ष के पटेलनगर, नई बस्ती, झिरगाडंडी, पिपरहवा में ही पानी नहीं पहुंच पाया है। ग्राम प्रधान सोनी देवी व उनके पति अमरेश यादव बताते हैं कि जो इलाके नीचे हैं, वहां भी सप्ताह में एक-दो बार पानी जाता है, अन्य क्षेत्रों में इस परियोजना से कहीं पानी आज तक नहीं पहुंचा।
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हैंडपंपों में लगे रिमूवल प्लांट बेकार
पड़रक्ष के पूर्व प्रधान मुंद्रिका सिंह के घर के पास लगे हैंडपंप फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगा है, लेकिन कुछ दिन बाद ही यह खराब हो गया। पूर्व प्रधान के मुताबिक इसकी मरम्मत की कोई व्यवस्था नहीं है। गांव के ही अन्य हैंडपंपों में भी रिमूवल प्लांट लगे हैं, लेकिन एक भी कारगर नहीं है। विवश होकर लोगों को फ्लोराइड वाला पानी पीना पड़ रहा है। हम जानते हैं कि पानी के रूप में धीमा जहर पी रहे हैं, मगर कोई विकल्प भी नहीं है।
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वर्जन...
ग्राम समूह पेयजल परियोजना पड़रक्ष से नौ गांवों को पानी देना था। अभी 3-4 गांवों में किसी तरह पानी पहुंचाया जा रहा है। अन्य गांवों में पानी न पहुंचने की कई तकनीकी वजहें हैं। विभाग के पास मेंटनेंस के लिए कोई अलग से बजट नहीं है। इसके समाधान के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। इसके बाद पाइप से पानी पहुंचने लगेगा। -अनिल कुमार, सहायक अभियंता जलनिगम।
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