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राख बांध टूटने के वजहों की जांच करेगी समिति

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राख बांध टूटने के बाद बचाए गए मजदूरों के साथ बचाव दल के सदस्य। - फोटो : SONBHADRA
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एनटीपीसी के सबसे बड़े ताप विद्युत गृह विंध्याचल का राख बांध टूटने व इसकी वजह से हुई क्षति की जांच समिति करेगी। पावर प्रबंधन घटना के पीछे उच्च हाइड्रो स्टेटिक दबाव को कारण बता रहा है। माना जा रहा है कि पूरी स्थिति विस्तृत जांच के बाद ही साफ होगी।
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एनटीपीसी लिमिटेड का 4760 मेगावाट क्षमता का कोयला आधारित ताप विद्युत गृह विंध्याचल पड़ोसी राज्य मप्र के सिंगरौली में स्थित है। इस पावर प्रोजेक्ट से निकलने वाली राख को पाइप लाइनों के जरिए राख बांध में गिराया जाता है। राख बांध का निर्माण रिहंद जलाशय के किनारे शाहपुर स्थान पर हुआ है। रविवार शाम पांच बजे के करीब राख बांध का एक हिस्सा टूट गया।
इसके बाद पानी के साथ राख का बहाव शुरू हुआ तो इलाके में अफरातफरी की स्थिति बन गई। पानी मिश्रित राख के जद में आने से मवेशी व आसपास काम कर रहे लोग फंस गए। सूचना पर राहत व बचाव दल के लोगों ने किसी तरह फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया लेकिन कई मवेशियों का मंगलवार को भी पता नहीं चल सका।
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बांध के टूटने से बिखरे राख के भारी भरकम मलबे की वजह से एनटीपीसी के साथ कई संविदा एजेंसियों की मशीनों व अन्य उपकरणों को को भारी क्षति पहुंची है। शुरूआती तस्वीरें सामने आने के बाद माना जा रहा है कि घटना से हुई क्षति करोड़ों रुपये में है। एनटीपीसी विंध्याचल के प्रवक्ता एलएम पांडेय ने बताया कि घटना के कारणों की पहचान करने के लिए एक जांच समिति का गठन किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि नुकसान का कारण बांध पर उच्च हाइड्रो स्टेटिक दबाव था, जिसके परिणामस्वरूप बांध क्षतिग्रस्त हो गया।
हाइड्रो स्टैटिक दबाव का निर्माण पिछले 10-15 दिनों से आस-पास के क्षेत्र में भारी बारिश के कारण हुआ था। पावर प्रोजेक्ट के प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि बांध से निकला हुआ राख का घोल एनटीपीसी परिसर के भीतर ही सीमित है, आसपास के गांव की भूमि में कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसके अलावा, घटना में किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान और ग्रामीणों की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचा है। स्थिति की निरंतर निगरानी के लिए एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है और एनटीपीसी, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए युद्ध स्तर पर चौबीसों घंटे काम कर रही है ।
एनजीटी में दाखिल की याचिका
अनपरा/शक्तिनगर। सोनभद्र-सिंगरौली को लेकर पूर्व में निस्तारित याचिका का हवाला देते हुए एनजीटी के याचिकाकर्ता एवं एडवोकेट अश्वनी कुमार दूबे ने सोमवार को एनजीटी में याचिका दाखिल कर एनटीपीसी विंध्यनगर को राख के सही निस्तारण, ऐश डैम टूटने के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का अध्ययन कराकर जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिए जाने की मांग की है। उन्होंने याचिका में पूर्व में ऐश डैम के रखरखाव, पर्यावरण संरक्षण को लेकर एनटीपीसी विंध्यनगर और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिए गए निर्देशों का हवाला भी दिया है।
भूजल प्रदूषण में होगी बढ़ोत्तरी
शक्तिनगर। एनटीपीसी विंध्याचल के ऐश डैम टूटने से जनहानि नहीं हुई है लेकिन बड़े भूभाग पर राख का फैलाव होने और ज्यादातर हिस्सा रिहंद डैम में जाने के कारण भूजल प्रदूषण में बढ़ोत्तरी की आशंका है। एनजीटी में याचिकाकर्ता जगतनारायण कहते हैं कि इससे रिहंद जैसे जलाशय का पानी तो विषाक्त होगा ही, भूजल के साथ ही एनटीपीसी विंध्याचल से रिहंद डैम तक का पर्यावरण भी दूषित होगा, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
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