फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राबर्ट्सगंज सीट पर हुई है सबसे नजदीकी हार-जीत

विज्ञापन
विज्ञापन
राबर्ट्सगंज सीट का चुनावी इतिहास काफी रोचक रहा है। इस सीट पर सूबे में सबसे कम अंतर से जीत-हार का रिकार्ड है तो यहां के मतदाताओं ने बड़ी जीत भी देखी है। यह वह सीट भी है जहां से हार्डकोर नक्सली ने निर्दल चुनाव लड़कर जीत दर्ज की है। कड़े मुकाबलों के कारण सुर्खियों में रही इस सीट पर फिर से चौंकाने वाले परिणाम की उम्मीद जताई जा रही है।
विज्ञापन

जिले की सबसे पुरानी इस सीट पर मतदाता पहले चुनाव से ही वोट देते आ रहे हैं। यहां तीन बार जीत-हार का अंतर ढाई सौ वोटों से भी कम रहा है। सबसे कड़ा मुकाबला 1974 के चुनाव में देखा गया था। तब भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार सूबेदार प्रसाद महज 21 वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे। खास बात यह थी कि इस चुनाव में 2419 वोट निरस्त हुए थे। विधानसभा चुनाव के अब तक के इतिहास में सबसे कम वोटों से हुई हार-जीत में इसका उल्लेख सबसे ऊपर है। वर्ष 2017 के चुुनाव में भाजपा उम्मीदवार भूपेश चौबे ने प्रचंड मोदी लहर में 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर अब तक की सबसे बड़ी जीत अपने नाम की थी। इसके पहले यह रिकार्ड घमड़ी राम के नाम था। हार्डकोर नक्सली रहे घमड़ी ने 1996 के चुनाव में निर्दल उम्मीदवार के रूप 35 हजार से भी बड़े अंतर से भाजपा उम्मीदवार को हराया था। सूबे में चल रही रामलहर के बावजूद घमड़ी राम ने भाजपा के तीन बार के विधायक तीरथराज को शिकस्त दी थी।
विज्ञापन

राबर्ट्सगंज सीट के तीन सबसे कम अंतर वाली जीत::
वर्ष 1974
सूबेदार प्रसाद जनसंघ 18423
राममूर्ति कनौजिया कांग्रेस 18402
अंतर 21
वर्ष 1962
रामनाथ पाठक कांग्रेस 14700
राज बहादुर निर्दल 14510
अंतर 190
वर्ष 2002
परमेश्वर दयाल सपा 34531
रामचंद्र त्यागी बसपा 34302
अंतर 229
राबर्ट्सगंज सीट पर तीन सबसे बड़े अंतर वाली जीत
वर्ष 2017
भूपेश चौबे: भाजपा: 89932
अविनाश कुशवाहा: सपा: 49394
अंतर: 40538
वर्ष 1996
हरिप्रसाद उर्फ घमड़ी: निर्दल: 76364
तीरथराज: भाजपा: 40646
अंतर: 35718
वर्ष 1989
तीरथराज: भाजपा: 44404
कल्लूराम: कांग्रेस: 18341
अंतर: 26063
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें