जिले में 20.57 करोड़ का कोई वारिस नहीं है। यह धनराशि विभिन्न बैंक खातों में लंबे समय से डंप है। अपनी पूंजी-अपना अधिकार अभियान के तहत रिजर्व बैंक ने इस धनराशि के मूल मालिक की खोजबीन शुरू की लेकिन तीन महीने की लंबे प्रयास के बाद भी सिर्फ 1.43 करोड़ रुपये के ही दावेदार मिले हैं। इस धनराशि पर भी 134 लोगों ने दावा किया। दावे की पड़ताल के बाद रुपये लौटा दिए गए, मगर शेष धनराशि अब वापस रिजर्व बैंक के डेफ खाता में स्थायी रुप से जमा हो गए हैं। अब इन पर क्लेम नहीं किया जा सकेगा।
लोग अपनी जरूरतों के अनुसार बैंकों में खाते खुलवाते हैं। उनसे लेन-देन करते हैं और फिर कुछ दिन बाद उसे छोड़ देते हैं। एकाउंट नंबर भूल जाने, अन्यत्र चले जाने या किसी अन्य कारणों से खाते का संचालन नहीं करते। लंबे समय से सक्रिय न होने से इन खातों में जमा पूंजी भी डंप रहती है। बैंक ऐसी राशि को रिजर्व बैंक के डेफ (डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड) खाता में ट्रांसफर कर देते हैं। सोनभद्र में ऐसे छह हजार खातों में 22 करोड़ रुपये डेफ खाते में डंप पड़े थे। वित्त मंत्रालय की पहल पर रिजर्व बैंक ने इस धनराशि को उनके मूल वारिसों तक पहुंचाने के लिए 100 दिन का अभियान शुरू किया था। अपनी पूंजी-अपना अधिकार अभियान के तहत छह जनवरी तक बैंकों की ओर से अलग-अलग क्षेत्रों में कैंप लगाकर लोगों को यह धनराशि वापस पाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। बैंक में दर्ज विवरण के आधार पर उनके पते पर सूचना भेजकर भी पैसा वापस लेने के लिए प्रेरित किया गया। तमाम कवायद के बाद भी महज 134 लोग ही अपना पैसा लेने के लिए आगे आए। उनकी ओर से कुल जमा 1.43 करोड़ रुपये पर दावा पेश किया गया। शेष 20.57 करोड़ रुपये का कोई दावेदार सामने नहीं आने पर यह राशि रिजर्व बैंक के डेफ खाते में स्थायी रुप से जमा हो गई है।आंकड़ों पर गौर करें तो डंप धनराशि पर दावा करने वालों में 14 लोग ऐसे थे, जिन्हें 1.34 करोड़ रुपये वापस मिले हैं। इसमें इंडियन बैंक से जुड़े 8 खाताधारकों को 1.22 करोड़ रुपये वापस किए गए। एसबीआई के तीन खाताधारकों को 8.22 लाख, पीएनबी ने एक ग्राहक को 2.10 लाख और बैंक ऑफ बड़ौदा ने दो ग्राहकों को 2.04 लाख रुपये की पूंजी लौटाई है। अभियान के दौरान ऐसे 120 खाताधारक रहे, जिन्होंने क्लेम के जरिये 8.43 लाख रुपये वापस पाए। इन ग्राहकों के खाते में एक लाख से कम राशि डंप थी। इस तरह के सबसे ज्यादा 42 क्लेम इंडियन बैंक में हुए, जिनसे 3.12 लाख रुपये वापस हुए। एसबीआई में 41 क्लेम से 2.37 लाख, पंजाब नेशनल बैंक में 15 क्लेम से 1.22 लाख, यूनियन बैंक में 12 क्लेम से 43 हजार रुपये वापस कराए गए। केनरा बैंक में एक, आईसीआईसीआई में चार, बैंक ऑफ बड़ौदा में 3, एचडीएफसी व इंडसंंड बैंक में एक-एक क्लेम सामने आए। अभियान के दौरान खाताधारकों को ढूंढने के लिए बैंकों की ओर से संबंधित को पत्र भेजे गए हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मामले आए, जिसमें बैंक के विवरण में दर्ज पते पर संबंधित नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं मिला। आसपास के लोग भी उनके बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाए। वहीं कुछ ऐसे भी मामले सामने आए, जिनमें खाताधारक और नाॅमिनी दोनों की मृत्यु हो चुकी है। उनकी संतानों में धनराशि लेने के लिए किसी एक नाम पर सहमति न होने से कोई दावा नहीं किया जा सका।
-सलन बागे, लीड बैंक मैनेजर ने बताया कि अपनी पूंजी-अपना अधिकार योजना के तहत रिजर्व बैंक के डेफ खाते में डंप राशि को उनके असली मालिक तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाया गया। कुल 100 दिन के इस अभियान में जिले के 134 दावों का निस्तारण करते हुए 1.43 करोड़ रुपये लौटाए गए। शेष धनराशि का कोई वारिस सामने नहीं आया।