सोनभद्र। जिले में प्रशासन और गैसे एजेंसी संचालकों का दावा है कि रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को सिलिंडर के लिए परेशान होना पड़ रहा है। गैस कंपनियों की ओर से बुकिंग के दो से तीन दिन के अंदर ही सिलिंडर देने की बात कही जा रही है, मगर उपभोक्ताओं को इससे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं सर्वर जाम होने से बुकिंग नहीं हो रही और फिर बुकिंग होने के बाद 5-6 दिन का इंतजार भारी पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुकिंग की समय सीमा 45 दिन किए जाने से स्थिति और गंभीर होने लगी है।
जिले में 44 गैस एजेंसियां संचालित हैं। ज्यादातर एजेंसियां ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। नए निर्देशाें के तहत नगरीय क्षेत्रों में कम से कम 25 दिन, जबकि ग्रामीण इलाकों में 45 दिनों के बाद ही बुकिंग हो पाएगी। वह रजिस्टर्ड नंबर से बुकिंग के लिए लगातार फोन मिला रहे हैं, लेकिन बुकिंग कंफर्म नहीं हो रही। सिलिंडर उपलब्ध न होने पर उन्हें दूसरे विकल्पों की मदद लेनी पड़ रही है।
रेणुकूट के उपभोक्ता राजू कुमार ने बताया कि छह मार्च को बुकिंग कराई गई थी। अब तक सिलिंडर नहीं मिला है। एजेंसी पर जाने के बाद पता चला कि अभी सिलिंडर ही नहीं आया है। दुद्धी के रामनगर निवासी उपभोक्ता राजेश कुमार ने बताया कि 12 फरवरी को सिलिंडर मिला था। उसके एक महीने बाद भी बुकिंग नहीं हो रही है। एजेंसी पर आने के बाद कर्मचारी 30 मार्च को बुकिंग की बात कह रहे हैं। रॉबर्ट्सगंज के उपभोक्ता राजू उपाध्याय ने बताया कि गैस सिलिंडर खत्म होने वाला है। बुकिंग की समय सीमा भी पूरी हो चुकी है। तीन दिन से लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बुकिंग ही नहीं हो रही। म्योरपुर कस्बा निवासी विशाल अग्रहरि का कहना है कि काफी प्रयास के बावजूद गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है। भारत गैस का कनेक्शन होने के बावजूद वह लगातार प्रयास में है कि उन्हें सिलिंडर उपलब्ध हो जाए, लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा है। शुभम कुमार ने बताया कि सिलिंडर के लिए वह कई दिनों से एजेंसियों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिल सकी है।
तीन दिन में आया सिर्फ एक लोड
रेणुकूट। स्थानीय एजेंसी पर पिछले तीन दिनों में मात्र एक ही लोड गैस सिलिंडर का आया है। सर्वर फेल होने की वजह से नए सिलिंडर की बुकिंग नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं, गैस एजेंसियों से उपभोक्ताओं को वितरित किए जा रहे सिलिंडर भी कंपनी के पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। इससे एजेंसियों के खाते में सिलिंडर बैलेंस दिखाई दे रहा है और नया लोड मंगाने में भी दिक्कत आ रही है। हिंडाल्को और ग्रासिम जैसे बड़े प्रतिष्ठानों की कैंटीन में कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण संचालन प्रभावित हुआ है।
नहीं मिल पा रहा पर्याप्त कोयला
रेणुसागर। अनपरा परिक्षेत्र में कोल खदान, रेलवे साइडिंग पर गिरा कोयला को मजदूर चुनकर उसे बाजार में 100 रुपये बोरी (20 किलो) में बेचते थे। कोयले की खपत बढ़ जाने से अब वह कोयला भी पर्याप्त नहीं मिल पा रहा है। अनपरा बाजार के इलेक्ट्रॉनिक दुकान के संचालक विकास विश्वकर्मा ने बताया कि इंडक्शन चूल्हा, इलेक्ट्रॉनिक कूकर, डीजल चूल्हा की मांग बढ़ गई है। वहीं होटल रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट कारोबारी भी कॉम्बी ओवन, इलेक्ट्रिक राइस कुकर, इंडक्शन चूल्हा खरीदने के लिए दुकान पर आ रहे हैं।
गैस वितरक वाहनों पर लगा नो डीएसी-नो गैस का बोर्ड
अनपरा। एक तरफ घरेलू गैस बुकिंग की नई व्यवस्था से लोगों को गैस लेने में काफी परेशानी हो रही है तो वहीं व्यवसायिक गैस मिल नहीं रहा। कालाबाजारी करने वाले बिचौलिए रसोई गैस को दो दोगुने दामों पर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचा रहे हैं। कंपनी के नए नियम के अनुसार टोल फ्री नंबर पर मिस कॉल के बाद मिलने वाले ओटीपी के बाद ही गैस उपभोक्ताओं को दिया जाएगा, लेकिन इन दिनों दिन के समय टोल फ्री नंबर पर फोन करने पर लग ही नहीं रहा। लग भी रहा है तो ओटीपी नहीं आ रहा है। गैस वितरक ने वाहनों पर लिख दिया है कि नो डीएसी (ओटीपी) नो गैस।
भ्रम फैलाने वालों पर होगी सख्ती
डीएम बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि जिले में रसोई गैस की किल्लत नहीं है। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता से सिलिंडर आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पारदर्शी वितरण के लिए ओटीपी के माध्यम से रिफिल डिलीवरी की व्यवस्था की जा रही है। भ्रम फैलाने वाले सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। गैस एजेंसियों से किसी भी प्रकार की कालाबाजारी/अवैध बिक्री को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व विभाग, खाद्य एवं रसद विभाग और तेल कंपनियों के नोडल अधिकारियों के साथ प्रशासन व पुलिस के अधिकारी भ्रमणशील रहें।
गैस न मिलने के कारण मिष्ठान एवं नाश्ता का व्यवस्था चौपट हो रहा है। गोदाम पर काॅमर्शियल गैस नहीं आ रही। घरेलू बिना ओटीपी मिल नहीं रहा। ऐसे में कैसे व्यवसाय चलाएं। -आशीष गोयल, मिठाई दुकानदार।
एलपीजी सिलिंडर का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है। शनिवार को वाराणसी से लकड़ी के कोयला और डीजल भट्टी लेने जा रहा हूं। काॅमर्शियल गैस नहीं मिल रहा है। -मोनू दुबे, रेस्टाेरेंट संचालक, औड़ी मोड़।
ऑनलाइन बुकिंग अधिक होने से सर्वर फेल हो गया है। घर में रसोई गैस नहीं है। सुबह बच्चों को स्कूल टिफिन बनाने में सबसे ज्यादा समस्या है। कोयले की भट्टी ही सहारा बना है। -गोविंद कुमार, परासी।
अनपरा नगर में काॅमर्शियल सिलिंडर की किल्लत पहले से ही थी। परियोजना में वेल्डिंग कार्य करने के लिए बड़ी मुश्किल से मिलता था। अब घरेलू रसोई गैस भी नहीं मिल रही। बिना बुकिंग एजेंसी गैस नहीं दे रही। -मंतोष तिवारी, परियोजना संविदाकार।
मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई है। अगले सप्ताह में तेरही है। हलवाई ने पांच गैस सिलिंडर की व्यवस्था करने को कहा है। फोन कर रहें लेकिन ओटीपी नहीं आ रहा है। गैस ऐजेंसी वालों ने साफ कहा है कि बिना ओटीपी के गैस नहीं दी जाएगी। - जय प्रकाश भारती उपभोक्ता।
गैस सिलिंडर की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। पहले जहां गैस सिलिंडर की डिलीवरी दूसरे दिन ही हो जाती थी, वहीं वर्तमान में डिलीवरी में तीन से चार दिन का समय लग रहा है। एक साथ बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की ओर से सर्वर पर बुकिंग करने के कारण सर्वर डाउन हो जा रहा है। शाम छह बजे के बाद सर्वर सामान्य रूप से काम करने लगता है। -हर्ष गुप्ता, नोडल अधिकारी, इंडेन।
रॉबर्ट्सगंज हाइडिल मैदान में गैस सिलेंडर लेते उपभोक्ता। संवाद
रॉबर्ट्सगंज हाइडिल मैदान में गैस सिलेंडर लेते उपभोक्ता। संवाद
रॉबर्ट्सगंज हाइडिल मैदान में गैस सिलेंडर लेते उपभोक्ता। संवाद