तहरीर के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म, हत्या के साथ ही पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज किया। विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की गई। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान और पत्रावली के अवलोकन के बाद दोषसिद्ध पाकर शहजाद को फांसी की सजा सुनाई।
इसके साथ ही अदालत ने उस पर दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अभियोजन की ओर से इस मामले में शासकीय अधिवक्ता दिनेश अग्रहरि एवं सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने बहस की।
मिर्जापुर से अलग होकर 4 मार्च 1989 को बने सोनभद्र जिले में बुधवार को फांसी की तीसरी सजा सुनाई गई। सबसे पहले एडीजे एफटीसी रहे एके द्विवेदी ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।
उसके बाद दूसरी सजा वर्तमान में एडीजे द्वितीय सोनभद्र राहुल मिश्रा ने सुनाई थी। बुधवार को एडीजे/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो सोनभद्र पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने तीसरी फांसी की सजा सुनाई है।