फट जाता है टयूब, करनी पड़ती है सर्जरी
बीएचयू स्त्री रोग विभाग की प्रो. ममता का कहना है कि अगर स्वास्थ्य संबंधी कारणों से किसी महिला को गर्भपात की जरूरत होती है तो वह डॉक्टर की सलाह पर ऐसा करवा सकती हैं। गर्भधारण के शुरुआती दो महीने तक ही ऐसा हो सकता है। ओपीडी में तीन-चार महीने से देखने को मिल रहा है कि महिलाएं गर्भपात की दवा खाने के बाद होने वाले संक्रमण सहित अन्य समस्याओं को लेकर आ रही हैं। कई मामलों में देखने को मिल रहा है कि दवा खाने के बाद भी गर्भ पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाता है। महीने में 10 ऐसी महिलाओं की सर्जरी करनी पड़ रही हैं। कई मामलों में गर्भपात की गोली काम नहीं करती हैं, इससे गर्भाशय में ट्यूब फट जाता है, शरीर में खून की कमी होती है और जान का खतरा बढ़ जाता है।
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बिना पर्चे के दवा देना गैरकानूनी
स्त्री रोग विशेषज्ञों की संस्था वोगसी वाराणसी शाखा की पूर्व अध्यक्ष और आईएमए की उपाध्यक्ष डॉ. शालिनी टंडन का कहना है कि बिना डॉक्टर की सलाह के धड़ल्ले से जिस तरह गर्भपात की दवा बिक रही है, यह पूरी तरह गैर कानूनी है। नियमों के अनुसार, कुछ परिस्थतियों में 7-8 सप्ताह में डॉक्टर की सलाह पर ही गर्भपात वाली दवा ली जा सकती है। निजी अस्पतालों में भी महिलाएं आ रही हैं।
गर्भपात के बाद यह होती है समस्या
- अधिक रक्तस्राव
- गर्भाशय में संक्रमण
- पेट में दर्द और कमजोरी बने रहना
- आगे चलकर गर्भधारण करने में भी समस्या