सोनभद्र। स्वास्थ्य विभाग के एक लिपिक के खिलाफ कथित फर्जी अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र के मामले में वर्ष 2006 में दर्ज मुकदमे की सुनवाई तेज हो गई है। अदालत ने साक्ष्य के लिए पूर्व बीएसए को सम्मन जारी कर तलब किया है। नोटिस में कहा गया है कि साक्ष्य के लिए न्यायालय में उपस्थित होने में किसी तरह की त्रुटि न की जाए।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता अजीत कुमार सिंह ने चार जुलाई 2006 को राॅबर्ट्सगंज कोतवाली में तहरीर दी थी कि जिला चिकित्सालय में कार्यरत एक वरिष्ठ लिपिक फर्जी जाति एवं शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवारत है। उसकी जाति कहार है लेकिन उसने खरवार जाति का प्रमाण पत्र लगाकर फर्जी तरीके से प्रोन्नति प्राप्त कर ली, जबकि उसकी मां और बहन दाई के पद पर कार्यरत रही हैं और उनकी सेवा पुस्तिका में जाति कहार अंकित है। आरोपी की जन्मतिथि भी उसके शैक्षिक व अन्य अभिलेखों में भिन्न-भिन्न है। दावा किया गया है कि आरोपी कक्षा 8 फेल है। वहीं आरोपी पक्ष का कहना है कि उसे झूठा फंसाया गया है। वर्ष 2006 और वर्ष 2009 में सीएमओ इसे लेकर पत्र लिख चुके हैं। 20 सितंबर 2018 को आई जांच समिति की रिपोर्ट में उसकी जाति खरवार बताई गई है। पुलिस ने पहले इसमें क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी लेकिन वादी की तरफ से दायर की गई विरोध याचिका पर आगे की जांच में एक दिसंबर 2009 को बगैर किसी सबूत के आरोप पत्र प्रेषित कर दिया गया। अब कक्षा आठ में फेल होने के किए जा रहे दावे के परीक्षण के लिए पुलिस जांच में बयान दर्ज कराने वाले तत्कालीन बीएसए मनोहर प्रसाद को नोटिस जारी कर साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया है।