विण्ढमगंज क्षेत्र में वट वृक्ष की पूजा में कथा श्रवण करती महिलाएं।
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सुहाग की रक्षा की कामना के साथ सुहागिन महिलाओं ने सोमवार को सोमवती अमावस्या और वट सावित्री की पूजा की। वट वृक्ष पीपल और बरगद के पेड़ के फेरे लगाते हुए कच्चे धागे लपेटकर महिलाओं ने विधि विधान से पूजा की। इसके बाद ब्राह्मण भोज कराते हुए श्रद्धा के अनुसार दान पुण्य की। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु की कामना की।
राबर्ट्सगंज नगर के उत्तर मोहाल स्थित केडिया हनुमान मंदिर परिसर, दरोगा जी की गली, दंडइत बाबा मंदिर परिसर के साथ ही कम्हारी गांव स्थित बरगद के पेड़ के नीचे पीपल के पेड़ के नीचे महिलाओं ने सुबह सोमवती अमावस्या पर पूजन किया। सावित्री एवं सत्यवान से जुड़ी कथा सुनीं। आचार्य पंडित वेदप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि वट सावित्री एवं सोमवती अमावस्या पूजन महिलाएं सुहाग की रक्षा के लिए करती हैं। दोनों पर्व एक ही दिन पड़ने की वजह से और भी खास हो गया। विंढमगंज के मां काली मंदिर परिसर से सट बरगद के वृक्ष के नीचे पंडित राजू रंजन तिवारी ने पूजा कराते हुए कहा कि वट सावित्री का व्रत सौभाग्यवती महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं। वट सावित्री व्रत में आम, केला, चना, पूरी, खरबूजा, पुआ आदि इन सभी चीजों से वट वृक्ष की पूजा की जाती है। जब व्रत पूरा हो जाता है, तब इन्हीं चीजों को खाया जाता है। दुद्धी नगर पंचायत और कोन क्षेत्र के साथ ही चोपन, घोरावल, करमा, रामगढ़, रेणुकूट, शक्तिनगर के अलावा गांवों में सोमवती अमावस्या एवं वट सावित्री की पूजा सुहागिन महिलाओं ने विधि विधान से की।