सोनभद्र। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 22 फरवरी से शुरू हाेनी हैं। नकलविहीन और पारदर्शी ढंग से परीक्षा कराने के लिए बोर्ड ने केंद्र निर्धारण के लिए कई मानक तय किए थे। विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं का कई चरणों में सत्यापन भी कराया गया। बावजूद जिले में कई ऐसे विद्यालयों को केंद्र बना दिया गया है, जिन पर जरूरी इंतजाम ही नहीं है। कहीं बच्चों को बैठाने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच नहीं है तो कहीं सुरक्षा के लिए बाउंड्री, गेट, सड़क नदारद है। अब केंद्र तय होने के बाद संबंधित प्रधानाचार्य इन सुविधाओं को पूरा करने में लगे हैं। पास-पड़ोस के दूसरे विद्यालयों और जनसहयोग के जुगाड़ से जरूरतें पूरी हो रही हैं।
बोर्ड परीक्षा के लिए जिले हाईस्कूल और इंटर के 47787 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। इनकी परीक्षा कराने के लिए कुल 76 विद्यालयों को केंद्र बनाया गया है। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए जिला स्तरीय समिति ने अधिकांश राजकीय विद्यालयों को ही केंद्र बनाने में वरीयता दी है। इस कोशिश में ऐसे विद्यालयों को भी केंद्र बना दिया गया है, जिन पर जरूरी सुविधाएं ही नदारद हैं। सत्यापन के दौरान भी उन विद्यालयों पर परीक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं पाए गए थे। यहां तक कि केंद्रों की अंतिम सूची जारी होने से पहले भी यहां के प्रधानाचार्यों ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए अपने विद्यालय को केंद्र न बनाने की दलील दी थी। बावजूद अंतिम सूची में ऐसे विद्यालयों के नाम रह गए हैं। फिलहाल ऐसे तीन विद्यालय हैं। इन पर छात्र-छात्राओं का आवंटन भी काफी हुआ है। अब ऐसे में सकुशल परीक्षा कराने के लिए विद्यालय प्रबंधन सुविधाएं जुटाने में हांफ रहा है। कोई आसपास के दूसरे विद्यालयों से परीक्षा कराने के लिए संसाधन उधार ले रहा है तो कहीं क्षेत्र के प्रबुद्ध लोगों व आपसी सहयाेग से व्यवस्था करने में जुटे हैं।
केस एक::
स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं, बाउंड्री और गेट भी नदारद
पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज रामगढ़ को केंद्र बनाया गया है। मुख्य मार्ग से इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है। बाउंड्री न हाेने से विद्यालय में कई तरफ से असामाजिक तत्वों के घुसने का अंदेशा रहता है। गेट भी नदारद है। करीब एक साल पहले ही शुरू हुए इस विद्यालय की अधिकांश खिड़कियों के शीशे टूट गए हैं। डेस्क-बेंच और सीसी टीवी कैमरा भी यहां उपलब्ध नहीं था। हालांकि प्रधानाचार्य के प्रयासों से परीक्षा कराने के लिए दूसरे विद्यालयों से कुछ डेस्क-बेंच उधार लिया गया है। कैमरे की व्यवस्था विभाग ने करा दी है। सड़क, बाउंड्री, गेट के अभाव में पूरा परिसर असुरक्षित है। स्ट्रांग रूम में उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्न पत्र की सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।
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केस दो::
आनन-फानन बन रही बाउंड्री, कैमरों के लिए घर से लाए टीवी
मुड़िलाडीह में स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज का हाल भी कुछ ऐसा है। यहां दोनों पालियों में कुल 1147 बच्चों की परीक्षा होनी है। केंद्र बनने तक यहां कोई सुविधा नहीं थी। बाद में अफसर हरकत में आए तो डीएमएफ निधि से बाउंड्री का काम शुरू हुआ है। यह भी अब तक पूरा नहीं है। कुछ डेस्क-बेंच उधार में मिले हैं। सीसीटीवी कैमरा तो विभाग ने लगवा दिया है, लेकिन इसकी स्क्रीन की व्यवस्था स्टाफ ने खुद से की है। बगल के विद्यालय से पानी लिया जा रहा है। शौचालय की कमी है।
वर्जन...
केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया ऑनलाइन थी। राजकीय विद्यालय को ही प्राथमिकता देना था। कुल 76 केंद्र बनाए गए हैं। सभी पर आवश्यक सुविधाएं पूरी की जा चुकी हैं। जिन केंद्रों पर सुविधाओं की कमी है, उसे भी परीक्षा से पहले तक पूरा कर लिया जाएगा। निष्पक्ष और सकुशल परीक्षा कराने में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। - आरपी यादव, डीआईओएस।