सपा ने रवि सिंह गोंड और बसपा ने दिग्गज आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड के पुत्र वीरेंद्र सिंह गोंड को मैदान में उतारा था। किसी को भरोसा नहीं था कि वह विधायक बनेंगे, मगर राजयोग का असर रहा कि वह न सिर्फ बड़े वोटों के अंतर से विधायक बने बल्कि मंत्री पद भी हासिल हुआ।
अब लगातार दूसरी बार उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिली है। इस बार चुनाव में वह जिले की चारों सीटों में सबसे बड़ी जीत हासिल करने वाले प्रत्याशी हैं। उन्हें करीब 26 हजार वोटों से जीत मिली है। नवनिर्वाचित मंत्री संजीव सिंह गोंड ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि पार्टी ने मुझे यह मौका दिया। यह हमारे क्षेत्र की जनता और संपूर्ण आदिवासी समाज का सम्मान है। पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के भरोसे पर खरा उतरते हुए अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करूंगा।
चोपन ब्लॉक के खनन क्षेत्र बिल्ली मारकुंडी निवासी संजीव सिंह गोंड वर्ष 2017 में जनजातीय वर्ग के लिए आरक्षित सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे। पिछली सरकार के सितंबर में हुए मंत्रिमंडल के अंतिम विस्तार में जनजातीय कोटे से संजीव सिंह गोंड को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
बाद में उन्हें समाज कल्याण विभाग आवंटित हुआ था। इस बार चुनाव में उनकी जीत के बाद से ही यह दावे किए जाने लगे थे कि मंत्रिमंडल के पहले गठन में ही संजीव सिंह गोंड को मंत्री पद मिलेगा। संजीव भी इसे लेकर आश्वस्त थे। होली के बाद से ही उन्होंने लखनऊ में डेरा डाल दिया था।
सोनभद्र में राबर्ट्सगंज बढ़ौली चौक पर एलएडी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शपथ ग्रहण देखते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
पत्नी लीला देवी सहित परिवार के अन्य सदस्य भी लखनऊ पहुंच गए थे। पार्टी के नेताओं से लगातार मुलाकात का दौर जारी रहा। शुक्रवार की सुबह उन्हें फोन कर उन्हें मुख्यमंत्री आवास बुलाया गया। वहां पहुंचने पर मंत्री बनाए जाने की जानकारी दी गई। दोपहर बाद इसकी सूचना सार्वजनिक हुई तो समर्थकों में खुशी छा गई। चोपन, डाला, ओबरा, अनपरा सहित अन्य स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
वर्ष 2022 के चुनाव वह पहला मौका रहा, जब सोनांचल की चारों सीटों पर भाजपा कमल खिलाने में कामयाब रही। इस जीत का बड़ा श्रेय आदिवासी वोटरों को भी है। जिले की अधिकांश आबादी इसी वर्ग से हैं। यूपी विधानसभा में दो सीटें ही अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
यह दोनों सीटें सोनभद्र में है। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने ओबरा सीट तो जीत लिया था, लेकिन दुद्धी सीट सहयोगी अपना दल-एस को देनी पड़ी थी। इस बार दोनों ही जगहों से भाजपा ने प्रत्याशी उतारा और बड़े वोटों के अंतर के साथ ऐतिहासिक जीत भी हासिल की।
इस जीत का इनाम ही संजीव सिंह गोंड के रूप में आदिवासी चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह के रूप में दिया गया है। माना जा रहा है कि इसके माध्यम से भाजपा आदिवासी वोटरों में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए मिशन-2024 को साधने में जुटी है।
मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के दौरान सोनभद्र में राबर्ट्सगंज बढ़ौली चौक पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर के साथ खुशी का इजहार करते भाजपा कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
जनजातीय समाज को सपा-बसपा का परंपरागत वोटर माना जाता रहा है। इन्हीं के वोटों की बदौलत जिले में सपा और बसपा को पूर्व के चुनावों में लगातार जीत भी हासिल होती रही। विपक्षी दलों के वोट बैंक में सेंध लगाते हुए अपनी पैठ मजबूत बनाने के लिए चुनाव से ठीक पहले योगी सरकार ने अंतिम मंत्रिमंडल विस्तार में ओबरा विधायक संजीव सिंह गोंड को राज्य मंत्री का पद दिया गया था।
इसका असर भी जनजातीय वोटरों पर खूब हुआ। जनजातीय समाज के गोंड मतदाताओं की जिले में बड़ी संख्या है। पूर्व की सपा सरकार में मंत्री रहे विजय सिंह भी इसी वर्ग से आते थे। लिहाजा यह तय माना जा रहा था कि भाजपा की सरकार बनने पर जनजातीय वर्ग से एक मंत्री जरूर बनाया जाएगा। इसमें संजीव सिंह का दावा ही सबसे मजबूत था। संजीव सिंह पहले वनाधिकार समिति के अध्यक्ष भी रहे।
प्रोफाइल::
नाम: संजीव सिंह गोंड
पिता: स्व. रामलखन गोंड
उम्र: 46 वर्ष
शिक्षा: हाईस्कूल
पत्नी: लीला देवी गोंड (चोपन ब्लाक प्रमुख)
संतान: तीन पुत्र
व्यवसाय: कृषि