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Sonebhadra News: स्मारक का कहीं काम अधूरा, कहीं टूटने लगीं टाइल्स

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राबट्सगंज ब्लॉक के लसडा गांव का स्मारक द्वार।संवाद
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सोनभद्र। स्वतंत्रता के आंदोलन में अहम योगदान देने वाले महापुरुषों के नाम पर जिले में बने स्मृति द्वार को भी भ्रष्ट व्यवस्था ने नहीं बख्शा। किसी स्मृति द्वार का काम अधूरा है तो किसी में लगीं टाइल्स टूटकर गिरने लगी हैं। जिसका निर्माण एक साल पहले हुआ था, उसके भी पत्थर टूट रहे हैं।
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घोरावल विधानसभा के ऊंचडीह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित क्रांति पथ प्रवेश (स्मारक) द्वार का निर्माण कराया गया था। पूर्वांचल विकास निधि से 5.21 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। वर्ष 2022 में समृति द्वार बनकर तैयार हुआ। इसमें टाइल्स लगाने का काम सिर्फ दोनों खंभों पर किया गया। ऊपर के हिस्से में टाइल्स नहीं लगाई गईं। नौ अगस्त 2022 को क्षेत्रीय विधायक अनिल कुमार मौर्य ने इसका लोकार्पण किया था। तीन साल के भीतर ही इसकी टाइल्स टूटकर गिरने लगी हैं।
ऊंचडीह के लोगाें का कहना है कि स्मृति द्वार के निर्माण में मानक की अनदेखी की गई है। इसकी ऊंचाई भी कम है। स्मृति द्वार पर जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अंकित हैं, उनमें गौरीशंकर देव पांडेय ऊंचडीह, तियरा के देवेंद्रनाथ चौबे, महादेव चौबे और प्रभाशंकर शर्मा, करकी के यज्ञनारायण सिंह पटेल, रामप्रताप सिंह और गुलाब सिंह, देवरी कला के बाल गोविंद पांडेय, महुरेसर के अछैबर उपाध्याय तथा ओईनी मिश्र के राधा प्रसाद शर्मा शामिल हैं। क्रांति पथ के नाम से भी इसे जाना जाता है।
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दो साल में ही क्षतिग्रस्त हो गई टाइल्स
रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के लसड़ा गांव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बेनीमाधव देव पांडेय के नाम से करीब पांच लाख रुपये की लागत से तीन साल पहले स्मारक द्वार का निर्माण कराया गया था। स्मारक द्वार बनने के दो साल बाद ही इसमें लगे ग्रेनाइट पत्थर गिरकर टूट गए। इस समय स्मारक द्वार की स्थिति यह है कि इसमें लगे ज्यादात्तर पत्थर उखड़ गए हैं। करीब एक साल से अधिक समय से इसी हाल में स्मारक द्वार है, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर बने स्मारक द्वार का मरम्मत कार्य नहीं कराया जा सका है। यह स्मारक द्वार किस कार्यदायी संस्था ने बनाया है, कितनी लागत से बना है, इसका पत्थर भी नहीं लगाया गया। वहीं, मरकरी गांव में स्मृति द्वार का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।

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वर्जन:
ऊंचडीह में क्रांति पथ पर करीब 5.21 लाख रुपये से स्मृति द्वार का निर्माण कराया गया था। मानक के अनुसार निर्माण कार्य हुआ था। - संजय श्रीवास्तव, एई, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग।
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