एनसीएल के अमलोरी कोयला खदान में बुधवार की दोपहर हुई ब्लास्टिंग से छह लोगों के घायल होने के मामले की जांच शुरू हो गई है। एनसीएल मुख्यालय सिंगरौली से पहुंचे सुरक्षा अधिकारियों ने घटना से जुड़े पहलुओं की जानकारी एकत्रित किया। कहा जा रहा है कि बिना पुष्टि के ब्लास्ट कर दिया, जिसके चलते घटना हुई।
एनसीएल की कोयला खदानों में ब्लास्टिंग एक नियमित प्रकिया है। यह पहाड़ को उड़ाने के साथ कोयले की चट्टान को उड़ाने के लिए ब्लास्टिंग किया जाता है। जानकारों की माने तो ब्लास्टिंग का नियंत्रण एनसीएल के जिम्मेदार अधिकारी के पास होता है और ड्रील किए छेद में बारूद भरे जाने के बाद ब्लास्ट करने की पुष्टि के बाद कमान दी जाती है। अमलोरी में इसी प्रक्रिया के दौरान चूक हुई और वक्त से पहले ब्लास्ट हो गया, जिसके चपेट में आने से निजी कंपनी के छह मजदूर घायल हो गए।
अधिकारियों ने घटना की असल वजह साफ नहीं किया लेकिन बताते है कि निजी कंपनी के तरफ से पुष्टि नहीं हुई और ब्लास्ट करा दिया गया। घटना उस वक्त हुई जब निजी कंपनी के अधिकारी व कर्मी ब्लास्ट केंद्र की तैयारी पूरी कर रोजाना अपनाई जा रही प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहे थे।
दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के कुदरी गांव में नहर कार्य में ब्लास्टिंग के दौरान प्राथमिक विद्यालय के सोलर प्लेट पर पत्थरों के बड़े टुकड़े गिरने से सोलर प्लेट क्षतिग्रस्त हो गया है। विद्यालय के सहायक अध्यापक शशिकांत ने बताया कि नहर में ब्लास्टिंग होने से सोलर प्लेट क्षतिग्रस्त होने की सूचना खंड शिक्षा अधिकारी सुनील यादव को दी गई। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंच कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया। पता चला कि विद्यालय से महज 10 मीटर की दूरी पर ही नहर में बगैर किसी सूचना के ब्लास्टिंग किए जाने से सोलर प्लेट क्षतिग्रस्त हुआ है। कहा कि अगर इस पर अंकुश नहीं लगाया जाता है तो किसी भी दिन बच्चों को भी चोट लग सकती है। खंड शिक्षा अधिकारी ने कार्यदाई संस्था को नए सोलर प्लेट लगाने के निर्देश दिए हैं। नेडा से लगे छत्तरपुर, कुदरी, घसियाबस्ती, बैरखड़, हरपुरा गांवों में लगे आरओ प्लांटों का निरीक्षण किया।