शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी सोनभद्र के तत्वावधान में रविवार को दोपहर में शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को समर्पित कवि गोष्ठी आयोजित हुई। कवियाें ने अपनी रचनाओं के माध्यम से वीरों को नमन किया। इस दौरान छह कृतियों का विमोचन भी किया गया।
अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर ने किया। शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण दीपदान पश्चात राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। राष्ट्रगान पश्चात भारत माता वंदेमातरम् जयघोष के साथ ईश्वर विरागी के वाणी वंदना से कार्यक्रम का आगाज हुआ।
रामनाथ शिवेंद्र की बीसवीं कृति, अंगारों पर चलते हुए ओमप्रकाश त्रिपाठी की बारहवीं कृति, जीवन के रंग अनुभव के संग, सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम की कृति, वंदेमातरम् खंडकाव्य व संयुक्त कविता संकलन, सोन काव्यांजलि का विमोचन अतिथियों ने किया।
विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने वीर शहीदों के त्याग बलिदान कृतित्व व्यक्तित्व की विशद चर्चा की और राष्ट्रीय संचेतना संजोकर आगे बढ़ने को आवश्यक बताया। इसमें वरिष्ठ कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने जयहिंद वंदेमातरम् का जो करते सम्मान नहीं वे भारत माता के दुश्मन उनका हिंदुस्तान नहीं सुनाकर वाहवाही बटोरी।
आयोजक संयोजक प्रदुम्न त्रिपाठी ने पड़े जरूरत जब भी वतन को कफन बांध हम आयेंगे, काश लहू का इक इक कतरा भारत मां के काम आये.. सुनाकर लोगो से देर तक तालियां बजवाते रहे। धर्मेश चौहान ने सबसे सुंदर सबसे न्यारा भारत देश हमारा दिलीप सिंह दीपक ने तुम सबकुछ बेंच दो, लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो।
संचालन अशोक तिवारी ने किया। वरिष्ठ कवि शिवदास, शायर अब्दुल हई, दयानंद दयालू ने अपनी रचनाएं पढ़कर शहीदों को नमन किया। कवि प्रभात सिंह चंदेल ने भी अपनी रचना पढ़ी। रामनाथ शिवेंद्र संपादक असुविधा ने सदभावना की रचना।
हमें रोटियां ही दीजिए बहुत भूख लगी है दे रहे हो गीता कुरान किसलिए सुनाया और गंगा जमुनी तहजीब की बात किए। समाजसेवा के लिए फरीद अहमद को अंगवस्त्र लेखनी, पुस्तिका, प्रतीक चिन्ह, नकद धनराशि देकर माल्यार्पण किया गया। इस मौके पर राधेश्याम पाल, अरुण तिवारी,गोपाल कुशवाहा, विकास वर्मा, सुनील, जयराम सोनी, अभिनव आकाश, रिषभ त्रिपाठी, शिखा, संगीता तिवारी आदि रहे।