सोनभद्र। फर्जी शपथपत्र लेकर चार्जशीट से गबन की धारा हटाने के आरोप में ग्राम प्रधान, उसके भाई और संबंधित दरोगा (विवेचक) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला विंढमगंज थाने से जुड़ा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि फर्जी शपथ पत्र के सहारे न्यायालय में दाखिल किए गए आरोप पत्र से धारा 406 हटा दी गई। कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की गई है।
विंढमगंज थाना क्षेत्र के केवाल गांव निवासी पवन कुमार गुप्ता ने आरोपी रामप्रसाद यादव, उनके भाई शिव कुमार यादव और विवेचक सुरेशचंद्र यादव को जिम्मेदार ठहराया है। न्यायालय में दाखिल प्रार्थना पत्र में कहा है कि वह शारीरिक रूप से अशक्त है। उसकी तहरीर पर 11 अक्तूबर 2023 को विंढमगंज थाने में आपराधिक विश्वासघात, गाली-गलौज, धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
आरोपी धुमा गांव के प्रधान रामप्रसाद यादव ने अपने भाई के साथ मिलकर उसके पिता के नाम से फर्जी शपथपत्र तैयार कर विवेचक को उपलब्ध कराया। विवेचक ने उसी को आधार बनाकर धारा 406 हटा दी और महज गाली-गलौज की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। जब वह मुकदमे की पैरवी करने कोर्ट पहुंचे तो पता चला कि उनके पिता नागेश्वर के नाम का फर्जी शपथ पत्र लगाया गया है। उस पर जो हस्ताक्षर किए गए हैं, वह भी कूटरचित हैं।
दावा किया गया है कि जिस लिफाफे में भरकर शपथपत्र भेजा गया, उन सभी पर लिखे गए लेख किसी एक ही व्यक्ति के प्रतीत हो रहे हैं। उस पर जो मोबाइल नंबर लिखा है, वह आरोपी के सगे भाई शिवकुमार यादव का है। उनका आरोप है कि विवेचक ने उनके पिता के बयान लिए बिना फर्जी दस्तावेज को सही ठहरा दिया।
अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए विंढमगंज थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया। प्रभारी निरीक्षक चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच जारी है।
इस मामले में दर्ज कराई गई थी प्राथमिकी
दरअसल पूरा मामला पैसे के लेन-देन से जुड़ा है। पवन कुमार का आरोप था कि उनसे बिजली बिल सुधरवाने के नाम पर 51 हजार रुपये लिए गए थे। बिल में कोई सुधार न होने पर उन्होंने अपने रुपये मांगे तो उन्हें धमकी दी जाने लगी। उन्होंने समाधान दिवस में मामले की शिकायत की। अधिकारियों के निर्देश पर अक्तूबर 2023 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब उसी मामले में कोर्ट के आदेश पर दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है।