सोनभद्र। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की मनमानी का जवाब नहीं। जो कमरे बच्चों की पढ़ाई के लिए बनाए गए हैं, उसे किताबों का गोदाम बना दिया है। वहीं बरामदे में फर्श पर बैठाकर बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। यह स्थिति भी दूरदराज के गांवों की नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय की है। राबर्ट्सगंज नगर स्थित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में ठंड में बरामदे में बैठकर पढ़ने को विवश हैं।
जिले के 2061 परिषदीय स्कूलों में करीब 2.51 लाख बच्चों ने दाखिला लिया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब 15 लाख किताबों का आर्डर दिया है। दिसंबर से किताबों की आपूर्ति शुरू हुई है। नगर के कांशीराम आवासीय कॉलोनी परिसर में संचालित कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय मल्टी स्टोरी बिल्डिंग को विभाग ने अस्थायी गोदाम बना दिया है।
जिले में अब तक करीब साढ़े चार लाख किताबें पहुंच चुकी हैं। विद्यालय के चार से अधिक कमरों में किताबें भरी हैं। अभी करीब 10 लाख किताबें आनी हैं। ऐसे में दो-से तीन कमरे जो बचे हैं, उनके भी भरने की संभावना है। इन कमरों के बाहर ताला जड़ा है। इसकी चाबी कहां है, यह भी किसी को जानकारी नहीं है। कमरे बंद होने से करीब दो माह से बच्चे बाहर बरामदे में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
कक्षा एक से पांच तक के सैकड़ों विद्यार्थियों को उनकी कक्षाओं से बाहर कर दिया गया है, जबकि कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को भी बाहर करने की तैयारी है। ऐसे में बरामदे में फर्श पर बैठकर पढ़ाई उनकी भी मजबूरी होगी।
डेस्क छीनकर थमा दिया चटाई
जिले के परिषदीय स्कूलों में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और बेहतर माहौल में बच्चों के पढ़ाई के लिए सरकार ने स्कूलों में डेस्क उपलब्ध कराया है। मगर मल्टी स्टोरी के सैकड़ों बच्चों से विभाग ने उनकी डेस्क ही छिन लिया है। कक्ष में किताबें होने के कारण अब बच्चों को चटाई पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। यहां स्मार्ट क्लास का लाभ भी बच्चों को नहीं मिल पा रही है।
हर सत्र में छह से सात माह बरामदे में पढ़ाई
नगर के कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय मल्टी स्टोरी बिल्डिंग को हर साल किताबों के गोदाम के रूप में प्रयोग किया जाता है। विद्यालय के पांच से सात कमरों में किताबें भरी होती हैं। सत्र 2022-23 में जहां दिसंबर से मई-जून तक कई कमरों में किताबें भरी थीं। इस दौरान भी बच्चों को बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ी थी। वहीं चालू सत्र 2023-24 में दिसंबर माह से ही किताबें भरी गई हैं। इस स्कूल के हर साल गोदाम के रूप में उपयोग से बच्चे अपनी कक्षाओं से बेघर हो जा रहे हैं। स्कूल को हर साल गोदाम बनाया जा रहा है। यहां रखी किताबों का सत्यापन भी नहीं हो पाया है। मगर जिम्मेदारों को कमरे में बंद किताबों के वितरण की फिक्र नहीं है।
किताबों का सत्यापन कराना है। जिन्हें अप्रैल तक स्कूलों को भेज दिया जाएगा। बच्चों की सहूलियत का ध्यान दिया जा रहा है। - नवीन पाठक, बीएसए।