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नियम ताक पर रख करोड़ों खर्च

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बनवाया नाला
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ऊर्जांचल परिक्षेत्र में कोटा सहित कई ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां नियमों को दरकिनार कर परियोजनाओं की जमीन पर ग्राम पंचायत की निधि से कार्य कराए जा रहे हैं। जबकि पंचायत राज अधिनियम में इस पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध है। वहीं ग्राम पंचायत के बंटवारे के बाद भी पहले की ग्राम पंचायत को वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही धनराशि दी जा रही है।
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शक्तिनगर परिक्षेत्र की कोटा ऐसी ग्राम पंचायत है, जिसकी पूरी जमीन एनटीपीसी की है। इस गांव में एनसीएल का जल आपूर्ति संस्थान है लेकिन इसके लिए भी जमीन एनटीपीसी ने दे रखी है। पंचायत राज अधिनियम में कहा गया है कि पंचायतों द्वारा विकास कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा/भूमि पर ही कराए जा सकते हैं। ग्राम पंचायत निधि से किसी अन्य सरकारी जमीन या परिसंपदा पर विकास कार्य नहीं हो सकता। बावजूद  ग्राम पंचायत की ओर से तालाब खुदाई, नाला निर्माण सहित कई कार्य इस गांव की जमीन पर कराए जा चुके हैं।


 इसमें महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा), राज्य वित्त आदि मद शामिल है। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2005 से अब तक जहां कोटा में दस करोड़ की धनराशि खर्च हो चुकी है।
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इस अवधि में परिक्षेत्र में खर्च होने वाली धनराशि का आंकड़ा सौ से दो सौ करोड़ का है। दिलचस्प मसला यह है कि गत दिसंबर में कोटा ग्राम पंचायत की एरिया काटकर चिल्काडांड़ के नाम से अलग ग्राम पंचायत गठित की गई। इसके बाद इस ग्राम पंचायत की आबादी 13409 से घटकर तीन से चार हजार के आसपास आ गई। बावजूद 14वें वित्त की धनराशि पुरानी आबादी को ही आधार मानकर जारी की जा रही है। इसी तरह परिक्षेत्र के घरसड़ी, कोहरौल, ककरी, रेहटा आदि गांवों में भी परियोजनाओं की जमीन पर कार्य कराए जा रहे हैं।  


खंड विकास अधिकारी म्योरपुर आशाराम पटेल ने कहा कि कोटा सहित कई ग्राम पंचायतों में नियमानुसार कार्य नहीं कराए जा सकते। पर वहां के लोगों की सुविधा के लिए जमीन पर कार्य कराना मजबूरी है। परियोजना प्रबंधन चाहे तो आपत्ति कर काम रोकवा सकता है। बंटवारे के बाद भी ग्राम पंचायतों को पूर्व की भांति धन जारी करने का मामला शासन स्तर का है। वहीं से गड़बड़ी दूर होगी।
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