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Sonebhadra News: तंबाकू खाने से कैंसर का खतरा, दो साल में 300 से ज्यादा संदिग्ध मिले

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विश्व तंबाकू दिवस के लिए: डा.ज्योति अग्रवाल।
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सोनभद्र। खैनी, गुटखा, सुपाड़ी, मशाला तंबाकू का सेवन लोगों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। महज मेडिकल कॉलेज में दो साल के भीतर दांत, गला और मुख कैंसर के 300 से अधिक संदिग्ध मरीज पाए गए हैं। इसमें जिनकी हालत ज्यादा खराब है उन्हें महामना पंडित मदनमोहन मालवीय कैंसर केंद्र वाराणसी और कल्याण सिंह कैंसर अस्पताल लखनऊ रेफर किया गया। शेष को स्थानीय स्तर पर ही दवा-उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही। किसी न किसी रूप में लगातार तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति लोगों को प्री-कैंसर की तरफ धकेल रही है। जानकारी के मुताबिक, महज मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग में आने वाला हर 25वां मरीज ऐसी स्थिति से प्रभावित पाया जा रहा है।
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किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन कैंसर के साथ हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक और श्वसन संबंधी बीमारियों का प्रमुख कारण है। मेडिकल कॉलेज में दंत चिकित्सा विभाग की एसोसिट प्रोफेसर डॉ. ज्योति श्रीवास्तव ने बताया कि कैंसर, प्री-कैंसर की स्थिति ज्यादातर 50 वर्ष के ऊपर के लोगों में आती है लेकिन तंबाकू सेवन से इसका प्रकोप 20 से 40 वर्ष के लोगों में भी दिखने लगा है। कुछ ऐसे भी मामले आए जिनमें किशोर उम्र में ही प्री-कैंसर जैसी स्थिति देखने को मिली। बचाव के लिए जरूरी है कि किसी भी रूप में तंबाकू के सेवन से बचें। सेवन करने वाले नियमित चेकअप कराएं। लत नहीं छूट पा रही तो काउंसलिंग, निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद लें। मुंह-दांत में किसी तरह की दिक्कत बने तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।
समय से इलाज ही बचाव, लत छुड़ाने के लिए एनआर थेरेपी की लें
मुंह खुलने, जीभ के बाहर निकालने में दिक्कत, चेहरा या जीभ का कड़ा होना, मुंह के अंदर सफेद या सख्त रेशेदार रेखाएं बनने, तीखा, गर्म या मसालेदार भोजन के सेवन पर मुंह में तेज जलन, बार-बार छाले पड़ने की स्थिति बन रही हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। बहुत तीखे-मसालेदार भोजन के सेवन से बचें। दांत संबंधी किसी तरह की दिक्कत होने पर अस्पताल पहुंचे। लत छुड़ाने के लिए काउंसलिंग-निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद लें।
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टूथपेस्ट, दातून और ब्रश की खराब स्थिति बना सकती है मरीज
कई बार तंबाकू का सेवन न करने वालों में भी प्री-कैंसर (ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस) के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसमें गाल, होंठ और जीभ के आसपास की त्वचा सख्त हो जाती है और मुंह के खुलने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। बचाव के लिए जरूरी है कि ऐसे टूथपेस्ट का प्रयोग न करें जिसमें तंबाकू का प्रयोग हो। दांत की अवस्था के हिसाब से ब्रश काे लचीला और दातून की उंगली के बराबर मोटा रखें। उसके कूचे को ब्रश की तरफ मुलायम कर इस्तेमाल करें।

छह महीने के उपचार में कई ने जीत ली जिंदगी की जंग
कैंसर की गंभीर स्थिति की तरफ बढ़ते कई लोगों ने समय रहते उपचार लेकर महज छह महीने में ही जिंदगी की जंग जीत ली। चतरा ब्लाक क्षेत्र के शिवनारायण (77), लालसाहब (71) सहित ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने प्री-कैंसर की स्थिति में पहुंचने के बाद भी खुद को आसानी से ठीक कर लिया। डॉ. ज्योति श्रीवास्तव बताती हैं कि समय पर उपचार शुरू हो जाए तो महज 15 दिन में ही राहत मिलनी शुरू हो जाती है।

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तंबाकू का सेवन चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन, तनाव को और बढ़ा देता है। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों में इसकी लत कुछ ज्यादा ही मिलती है। छात्रों में यह उनकी एकाग्रता, स्मरण शक्ति और शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित करता है। बचाव के लिए जरूरी है कि किशोरों-युवाओं को इसके दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाए। खेल, योग, व्यायाम और अन्य रचनात्मक गतिविधियां बढ़ाई जाएं। परिवार भी तंबाकू-मुक्त वातावरण और बच्चों के सामने तंबाकू खाने से बचने की जिम्मेदारी निभाएं। डॉ. जीतेश कुमार गुप्ता, सहायक आचार्य, मनोचिकित्सा विभाग, मेडिकल कॉलेज।

विश्व तंबाकू दिवस के लिए: डा.ज्योति अग्रवाल।

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