प्रदेश ही नहीं देश के विद्युत उत्पादन के आधार स्तंभ रिहंद डैम का जलस्तर प्रचंड गर्मी में दिन प्रतिदिन खिसकता जा रहा है। इसके बाद भी बिहार से हुए समझौते के तहत जून के शुरुआत से ही डैम से सोन नदी में पानी छोड़ा जा रहा है।
सोन नदी की प्रमुख सहायक नदी रेणु पर स्थापित रिहंद डैम के निर्माण के समय ही यूपी व बिहार सरकार के मध्य जलाशय के पानी को लेकर समझौता हुआ है। इसके तहत सिंचाई व अन्य कार्य के लिए समय-समय पर बिहार के उपयोग के लिए रिहंद डैम से पानी छोड़ा जाएगा। वर्तमान में पूरा देश भीषण गर्मी व लू की चपेट में है। प्रचंड धूप व पछुआ हवा के झोंकों के कारण डैम के जलस्तर में तेजी से गिरावट हो रही है। शनिवार को रिहंद डैम का जलस्तर 841 फीट था जो पिछले वर्ष के सापेक्ष एक फीट कम है। मई में जब प्रदेश में बिजली की मांग रिकार्ड 25435 मेगावाट के उच्चतम स्तर पर पहुंची थी, तब भी रिहंद के पानी से संचालित होने वाले ताप बिजली घरों को पानी की कमी न हो इसके मद्देनजर प्रदेश को एक रुपये प्रति यूनिट से कम दर पर बिजली मुहैया कराने वाली रिहंद हाइड्रो के टरबाइनों को नहीं चलाया जा रहा था। जून की शुरुआत से ही बिहार को पानी देने के उद्देश्य से सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर प्रतिदिन रिहंद हाइड्रो के टरबाइनों को चलाया जा रहा है।
औसतन प्रतिदिन एक मियू विद्युत का हो रहा उत्पादन
रिहंद डैम के घटते जलस्तर के कारण लगभग न के बराबर विद्युत उत्पादन होने के कारण अप्रैल व मई महीने में रिहंद हाइड्रो लगातार लक्ष्य से पिछड़ रहा है। जबकि जून में स्थिति में सुधार देखा जा रहा है। रिहंद जल विद्युत के एक्सईएन ओएंडएम एसके राय ने बताया कि सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर एक जून से प्रतिदिन औसतन एक मियू विद्युत का उत्पादन किया जा रहा है।
10 हजार क्यूसेक छोड़ना है पानी
जून में बिहार के लिए 10 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाना है। टरबाइनों के चलाने से डिस्चार्ज पानी ओबरा डैम होते हुए सोन नदी में मिल जाएगा। बहरहाल बिहार के लिए पानी छोड़े जाने से समय पर मानसून का आगाज न होने पर डैम का जल स्तर क्रिटिकल स्तर पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।