मानसून नजदीक है। जून की पहली बारिश के साथ ही जर्जर पुल-पुलिया के पास मिट्टी दरकने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। जिले में 70 साल पुराने 20 से अधिक पुल और पुलियां जर्जर हैं। किसी की रेलिंग टूट चुकी है तो किसी की दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। कई स्थानों पर स्लैब भी दरक चुके हैं। इन पुल-पुलियों से प्रतिदिन तीन हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। स्कूली बच्चे, किसान और राहगीर को मिलाकर दो हजार से ज्यादा लोग पुल-पुलियों से आवागमन करते हैं लेकिन सुरक्षा के इंतजाम बदहाल हैं। आजादी के बाद प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान जिले में नहरों का तेजी से विस्तार किया गया था। सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नहरों पर बड़ी संख्या में पुल और पुलियों का निर्माण कराया गया। आजादी के बाद बनाए गए पुल-पुलिया अब बूढ़े हो चुके हैं। अधिकांश संरचनाएं की उम्र 60 से 70 वर्ष हैं। लगातार बढ़ते यातायात, रखरखाव की कमी और मौसम की मार से पुल-पुलियां जर्जर हो गई हैं। जिले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अलावा सिंचाई विभाग के चंद्रप्रभा, लघु डाल, बंधी प्रखंड तथा आईएस विभाग के जिम्मे इन पुल-पुलियों का रखरखाव है। हर वर्ष मरम्मत की योजनाएं बनती हैं, बजट भी खर्च होता है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर मरम्मत केवल कागजों तक या रंगाई-पुताई तक ही सीमित है। बरसात के मौसम में पुलियों के दोनों ओर मिट्टी कटने लगती है। रेलिंग न होने से वाहन चालकों को पुल की चौड़ाई का सही अंदाजा नहीं लग पाता। कई जगह पानी भर जाने से टूटे स्लैब और गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे बाइक, साइकिल और चार पहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।
कंदवा क्षेत्र में अमड़ा बड़ी नहर से निकली तेल्हरा माइनर के हेड पर बनी पुलिया 12 साल से रेलिंग विहीन है। पुलिया की रेलिंग टूटकर नहर में गिर चुकी है, जिससे यहां से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई राहगीर पहले भी नहर में गिरकर घायल हो चुके हैं। रात और बारिश के समय खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीण कमलेश राय, श्रीप्रकाश राय, विंध्यवासिनी राय, राणा प्रताप सिंह और गणेश सिंह का कहना है कि कई बार सिंचाई विभाग को शिकायत की गई, लेकिन अब तक नई रेलिंग लगाने या पुलिया की मरम्मत की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। धीना क्षेत्र में धीना रजबाहा और उससे जुड़ी माइनरों पर बनी एक दर्जन से अधिक पुलियां बदहाल हैं। कहीं स्लैब टूट चुके हैं तो कहीं साइडवाॅल गिर चुकी है। कई पुलियों से बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है।कमालपुर-अमड़ा मार्ग, सबल जलालपुर मार्ग, तम्मागढ़, सिकठा, नूरी, कुशहा, गोपालपुर, चिलबिली, डिग्घी, चखनिया-कम्हरिया तथा डैना-बडीहा मार्ग की पुलियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हैं। नूरी गांव में तो चार पहिया वाहनों को गांव पहुंचने के लिए दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग हर वर्ष ठीक पुलियों पर रंगाई-पुताई कर बजट खर्च दिखा देता है, जबकि जर्जर पुलियों की मरम्मत नहीं कराई जाती। चहनिया क्षेत्र के लोलपुर-मथेला, बलुआ-कैथी, दरियापुर-नादी, मथेला लिंक रोड और खोनपुर-अमिलाई मार्ग की कई पुलियां बिना रेलिंग की हैं। इन पुलियों के नीचे आठ से 12 फीट गहरी नहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो महीनों में कई लोग पुलिया से फिसलकर घायल हो चुके हैं। बरसात के दौरान पुलिया के किनारे की मिट्टी कट जाती है और पानी भरने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।-अच्छे खां, किसान ने कहा कि
क्षेत्र की कई माइनर पर एक भी पुलियां नई नहीं बनी है। सभी पुलिया तीस साल पहले की है जो जब जर्जर हो गई हैं। इन पुलियों से होकर आवागमन करना जोखिमभरा हो गया है।
दुर्गेश सिंह ने कहा कि मरम्मत के नाम पर कुछ पुलियों की केवल रंगाई-पुताई कराई गई है जबकि हर साल इसपर अच्छा-खासा धन खर्च किया जाता है। पुलियों की मरम्मत कराना आवश्यक है।
सिंचाई विभाग के चंद्रप्रभा प्रखंड की ओर से पिछले साल किसानों की सुविधा को लेकर पिछले साल जिले के 58 माइनरों में स्क्रैपिंग का कार्य कराया गया था। इसके लिए ढ़ाई करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस दौरान नहरों की सफाई के साथ तटबंधों की मरम्मत कराई गई थी। वहीं नहरों पर बनी पुलिया की मरम्मत पर भी अच्छा-खासा धन खर्च किया गया था। बावजूद इसके नहरों व उनपर बनी पुलिया का हाल बेहाल है। हालांकि स्क्रैपिंग कार्य के बाद नहरों से पानी सुचारू रूप से पहुंचने लगा है। संवाद किसानों की सुविधा के लिए अमड़ा बड़ी नहर पर चौहान बस्ती के पास बनाया गया छलका (स्केप) पिछले पांच वर्षों से जर्जर है। लंबे समय से मरम्मत के अभाव में छलका के नीचे बने छह पिलर ईंट दरकने से काफी जर्जर व कमजोर हो गए हैं जबकि ऊपर की स्लैब भी कई जगह टूटकर क्षतिग्रस्त हो चुका है। इससे कभी भी हादसा होने की आशंका है। किसानों के अनुसार इस छलके का निर्माण 1980 के दशक में कराया गया था। इसके जरिए किसानों को आवागमन और सिंचाई व्यवस्था में सहूलियत मिलती थी। वर्तमान में पिलर की ईंटें दरक गई हैं। स्लैब भी कई स्थानों से टूटने लगा है। संवाद
राजेश कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, चंदौली ने कहा कि जिले में नई पुल-पुलियों की कार्ययोजना बनाकर शासन को प्रेषित की गई है। योजना में मुगलसराय विधानसभा में 10, सकलडीहा में 11, सैयदराजा में 26 और चकिया विधानसभा में 31 पुल-पुलियों को शामिल किया गया है। शासन की मंजूरी मिलने और धन प्राप्त होने के बाद पुल-पुलियों का निर्माण कराया जाएगा।