शक्तिनगर। बिन मौसम हुई झमाझम बारिश ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी। शुक्रवार की शाम स्थिति ऐसी बनी की बरसात के पानी संग कोयले का मलबा (ओबी/ओवर बर्डेन) का बहाव देख ग्रामीणों को जान बचाकर भागना पड़ा।
इलाके में कई सालों से कोयला प्रोजेक्टों का अधिभार ओबी नुकसान पहुंचा रहा है। इसके बावजूद इसके लिए न तो कोई ठोस प्रबंध किया गया न ही बचाव के कारगर तरीके अपनाए गए। शुक्रवार दोपहर बाद बिना मौसम तेज चमक गरज के साथ करीब डेढ़ घंटे की बारिश ने ओबी डंप के करीब बसे ग्रामीणों को हिला कर रख दिया। बरसाती पानी के साथ मिलकर ओबी का मलबा फिसलना शुरू हुआ और ग्रामीणों के घरों के साथ खेतों में फैलना शुरू हुआ तो अमलोरी गांव के लोगों को भागकर जान बचाने को विवश होना पड़ा। ओबी के चलते किसानों की फसलें चौपट हो गई। घरों व बैठने उठने के जगहों पर हजारों टन मलबा जमा हो गया। यह कोई पहली घटना नहीं। बीते वर्षों में हुई बारिश से भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति बनी, लेकिन ओबी बहाव रोकने का लेकर ठोस प्रबंध नहीं हो सके। अमलोरी गांव (सिंगरौली) के रहवासियों का कहना है कि पिछली बरसात में भी निजी कोल माइंस के ओबी का मलबा घरों में घुसा था तब प्रबंधन व प्रशासन के अधिकारियों ने जद में आने वाले घरों को मुआवजा के साथ अन्य बसाने का वादा किया लेकिन हुआ कुछ नहीं। अमलोरी बस्ती (वार्ड 45) निवासी लक्ष्मण शाह ने व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया और कहा कि अनुरोध के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं। हालिया बहाव के चपेट में गांव के निवासी संतोष, सुरेश शाह, सत्यदेव लाल, समय लाल शाह और गंगा राम शाह सहित अन्य लोगों के घर व खेत आए है।
अधिभार व उसके मार को जानना जरूरी
शक्तिनगर। ऊर्जांचल में आबाद प्रोजेक्टों से कोयला निकासी के निमित्त खनन एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। भू-गर्भ में मौजूद कोयला को निकालने के लिए उसके ऊपर मौजूद मिट्टी व पत्थर के मलबे को ब्लास्टिंग कर उड़ाया जाता है। इसके बाद इसे हटाकर अधिभार (ओबी) का पहाड़ तैयार किया जाता है। बारिश में इसी ओबी पहाड़ के महीन कण बरसाती पानी संग तेजी से फिसलते हुए कई किलोमीटर क्षेत्र को जद में ले लेता है। इसका आकलन क्यूबिक मीटर में किया जाता है।