सोनभद्र। मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए तीन घंटे तक इंतजार कराया गया। जब सीओ ने कॉलेज के प्राचार्य से संपर्क किया तब उसका मेडिकल हो सका। जांच की प्रक्रिया में देरी होने के कारण पीड़िता का बयान दर्ज नहीं हो सका।
चोपन थाना क्षेत्र के एक गांव में पिता ने अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म किया था। पीड़िता के मामा की तहरीर पर सोमवार की देर शाम मुकदमा दर्ज किया गया था। मंगलवार को पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण और न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने कलमबंद बयान दर्ज कराया जाना था।
इसके लिए महिला कांस्टेबल सुबह 10 बजे ही उसे लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंच गई। चूंकि जिला अस्पताल भी वर्तमान में मेडिकल कॉलेज से ही संबद्ध है, इसलिए दुष्कर्म पीड़िताओं को चेकअप के लिए यहीं लाया जाता है। मंगलवार को नए नियमों का हवाला देते हुए आना-कानी की जाती रही। करीब ढाई घंटे का वक्त गुजरने के बाद भी उसका चिकित्सकीय परीक्षण नहीं हुआ तब इसकी जानकारी सीओ सिटी रणधीर मिश्र को दी गई।
उन्होंने पहले सीएमएस से बात की। कहा कि अगर कोई पेंच है तो उसकी लिखित में जानकारी दें। सीएमएस की तरफ इस मामले में किसी तरह की पहल या लिखित जानकारी देने पर चुप्पी साध ली गई। तब प्रकरण से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को अवगत कराया गया।
प्राचार्य के निर्देश पर करीब तीन घंटे बाद चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुरेश से संपर्क साधा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। प्रभारी निरीक्षक कुमुद शेखर सिंह ने बताया कि पीड़िता के कलमबंद बयान बुधवार को दर्ज कराए जाएंगे।
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दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच में आनाकानी की जा रही थी। जब इसकी जानकारी मिली तो तत्काल सीएमएस और प्राचार्य से संपर्क किया गया। इसके बाद पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण हो सका। - रणधीर मिश्रा, सीओ सिटी।