एक गांव की महिलाएं पैदल ही दूसरे गांव जाती हैं।
- फोटो : अमर उजाला
बारिश के अभाव में खेती न होने से भरण-पोषण के गंभीर संकट की कल्पना कर लोग सहमे हुए हैं। उन्हें सूखे की आशंका सता रही है। लिहाजा वह इंद्रदेव को मनाने में जुटे हैं। तरह-तरह के टोटके हो रहे हैं। पिछले दिनों तालाब के बीच बैठकर वरूण देव की पूजा की गई थी और अब एक गांव की महिलाएं दूसरे गांव जाकर तालाब में झाड़ू डूबोकर इंद्रदेव की मनुहार कर रही हैं।
रासपहरी की उर्मिला, फूलमति, सुशीला आदि का कहना था कि यह पूरा इलाका सिर्फ खेती और मजदूरी पर ही अाश्रित है। बारिश नहीं हुई तो खेती नहीं बचेगी और जब फसल नहीं होगी तो मजदूरी भी नहीं मिलेगी। इससे गंभीर हालात होंगे। लिहाजा इंद्रदेव को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहीं। जिन परिवारों की महिलाएं नहीं जा पा रहीं, वह दूसरों को चंदा देकर चढ़ावा चढ़ा रही हैं।